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6 May 2024 · 1 min read

🌸प्रकृति 🌸

कविता –7-🌸-प्रकृति 🌸
– ——————
महकी -महकी हवा है फैली
कली कली है खिली– खिली

फूलों ने जो मुखड़ा खोला है
रगीं – सुन्दर समां बनाया है

तितली उड़तीं फर- फर कर
भौँरे भी करते गुन – गुन उधर

कारे बदरा से बरसे जो बूंदे
कुछ अपनी अपनी सी लगती है

छम -छम बरस बरस बारिश
तन मन को मदिर बना देती
प्रेमरंग के सुहाने सपनों में
खोये है कुछ ऐसे दीवाने
जब सोये अरमां जाग उठे
मस्ती में डूबे वे मस्ताने

जाके उनका हाल क्या पूछें
मदहोशी का जो मौसम है

महाकी महकी हवा है फैली —
-कली कली है खिली खिली ===

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Language: Hindi
35 Views
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