Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Jun 2023 · 1 min read

🌷ज़िंदगी के रंग🌷

🌷ज़िंदगी के रंग🌷
*****************”
इंद्रधनुष सा , जीवन हो सतरंगी;
बै_आ_नी_ह_पी_ना_ला , संगी।

बैंगनी, जीवन में एकाग्रता लाए;
भोग और विलासिता को बढ़ाए।

आसमानी रंग, शीतलता समाए;
सुख, शांति व समृद्धि को बढ़ाए।

नीला रंग,है प्रतीक पौरुषता का;
रंग भरे मन में,बल व वीरता का।

हरे रंग ने ही तो , हरियाली लाई;
जन क्या, धरा भी लेती अंगराई।

पीले रंग से, बौद्धिक उन्नति आई;
सबने रंग रूपी , ज्ञान विद्या पाई।

नारंगी रंग ही तो,गेरुआ कहलाये;
सबके जीवन में,नया सबेरा लाए।

लाल रंग से, जीवन मंगलमय रहे;
प्रेम सह खुशी के संग ही भय रहे।

ज़िंदगी के रंग , हैं ये सबको प्यारे;
तन धरा से जोड़े,मन गगन हमारे।
“°°°°°°°°°°°°°°🙏°°°°°°°°°°°°°

स्वरचित सह मौलिक;
….. ✍️पंकज ‘कर्ण’
.. …कटिहार(बिहार)।

Language: Hindi
252 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from पंकज कुमार कर्ण
View all
You may also like:
बेशक प्यार तुमसे था, है ,और शायद  हमेशा रहे।
बेशक प्यार तुमसे था, है ,और शायद हमेशा रहे।
Vishal babu (vishu)
मईया एक सहारा
मईया एक सहारा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सुरमई शाम का उजाला है
सुरमई शाम का उजाला है
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
बदलते दौर में......
बदलते दौर में......
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
यह मत
यह मत
Santosh Shrivastava
ये कमाल हिन्दोस्ताँ का है
ये कमाल हिन्दोस्ताँ का है
अरशद रसूल बदायूंनी
*संवेदनाओं का अन्तर्घट*
*संवेदनाओं का अन्तर्घट*
Manishi Sinha
संस्कारों को भूल रहे हैं
संस्कारों को भूल रहे हैं
VINOD CHAUHAN
New Beginnings. 🌻
New Beginnings. 🌻
पूर्वार्थ
क्या हो तुम मेरे लिए (कविता)
क्या हो तुम मेरे लिए (कविता)
Monika Yadav (Rachina)
डबूले वाली चाय
डबूले वाली चाय
Shyam Sundar Subramanian
चंद मुक्तक- छंद ताटंक...
चंद मुक्तक- छंद ताटंक...
डॉ.सीमा अग्रवाल
स्याह एक रात
स्याह एक रात
हिमांशु Kulshrestha
हम कहाँ जा रहे हैं...
हम कहाँ जा रहे हैं...
Radhakishan R. Mundhra
वाल्मिकी का अन्याय
वाल्मिकी का अन्याय
Manju Singh
"तकरार"
Dr. Kishan tandon kranti
मेरे भी दिवाने है
मेरे भी दिवाने है
Pratibha Pandey
* आस्था *
* आस्था *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
24/248. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/248. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
खामोश अवशेष ....
खामोश अवशेष ....
sushil sarna
चुनिंदा अश'आर
चुनिंदा अश'आर
Dr fauzia Naseem shad
* कैसे अपना प्रेम बुहारें *
* कैसे अपना प्रेम बुहारें *
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कल शाम में बारिश हुई,थोड़ी ताप में कमी आई
कल शाम में बारिश हुई,थोड़ी ताप में कमी आई
Keshav kishor Kumar
*खाओ जामुन खुश रहो ,कुदरत का वरदान* (कुंडलिया)
*खाओ जामुन खुश रहो ,कुदरत का वरदान* (कुंडलिया)
Ravi Prakash
बेटा बेटी है एक समान,
बेटा बेटी है एक समान,
Rituraj shivem verma
अर्थ में,अनर्थ में अंतर बहुत है
अर्थ में,अनर्थ में अंतर बहुत है
Shweta Soni
पिता और पुत्र
पिता और पुत्र
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
एक ख्वाब थे तुम,
एक ख्वाब थे तुम,
लक्ष्मी सिंह
पर्यावरण संरक्षण*
पर्यावरण संरक्षण*
Madhu Shah
■ बच कर रहिएगा
■ बच कर रहिएगा
*प्रणय प्रभात*
Loading...