Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Oct 2022 · 1 min read

✍️’रामराज्य’

प्रतिवर्ष मेरा दहन करने
से भी आप अपने भीतर
की बुराई को अब तक
जला नहीं पा रहे हो

ये आपकी हार,नाकामी
या फिर कमजोरी मानो
आप अपने ही आप पर
विजय प्राप्त नहीं कर पा रहे हो

ये और बात है कि तुम्हारी
अनंतकाल की परंपरा
तुम्हे अखंडित रखनी है
इसीलिये तुम्हारे अंदर की
बुराई भी तुम्हे जिंदा रखनी है

मैं तो यूँही जलते रहता हूँ
और तुम्हारे अंदर की बुराई
को प्रतिदिन बढ़ता देखकर
तुमसे ही हारे हुए श्रीरामजी के
चिंतायुक्त चेहरे को निहारते रहता हूँ

आज फिर राम के नक़ाब में
हजारो रावण अंदर पाले हुए
मुझे दहन करेंगे एक अच्छे
‘रामराज्य’ के निर्माण हेतु…!
.………………………………………………………//
©✍️’अशांत’ शेखर
05/10/2022

1 Like · 2 Comments · 184 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
रुचि पूर्ण कार्य
रुचि पूर्ण कार्य
लक्ष्मी सिंह
सोच
सोच
Shyam Sundar Subramanian
मुक्तक
मुक्तक
गुमनाम 'बाबा'
बंद करो अब दिवसीय काम।
बंद करो अब दिवसीय काम।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
माँ की ममता के तले, खुशियों का संसार |
माँ की ममता के तले, खुशियों का संसार |
जगदीश शर्मा सहज
हमारा साथ और यह प्यार
हमारा साथ और यह प्यार
gurudeenverma198
मंतर मैं पढ़ूॅंगा
मंतर मैं पढ़ूॅंगा
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
जीवन में अहम और वहम इंसान की सफलता को चुनौतीपूर्ण बना देता ह
जीवन में अहम और वहम इंसान की सफलता को चुनौतीपूर्ण बना देता ह
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
कृष्ण की फितरत राधा की विरह
कृष्ण की फितरत राधा की विरह
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
*अच्छा रहता कम ही खाना (बाल कविता)*
*अच्छा रहता कम ही खाना (बाल कविता)*
Ravi Prakash
वो बचपन था
वो बचपन था
Satish Srijan
वक्त के साथ-साथ चलना मुनासिफ है क्या
वक्त के साथ-साथ चलना मुनासिफ है क्या
कवि दीपक बवेजा
प्रार्थना
प्रार्थना
Shally Vij
मन में संदिग्ध हो
मन में संदिग्ध हो
Rituraj shivem verma
जज़्बात - ए बया (कविता)
जज़्बात - ए बया (कविता)
sandeep kumar Yadav
"बखान"
Dr. Kishan tandon kranti
*जलते हुए विचार* ( 16 of 25 )
*जलते हुए विचार* ( 16 of 25 )
Kshma Urmila
हमारी काबिलियत को वो तय करते हैं,
हमारी काबिलियत को वो तय करते हैं,
Dr. Man Mohan Krishna
Plastic Plastic Everywhere.....
Plastic Plastic Everywhere.....
R. H. SRIDEVI
National YOUTH Day
National YOUTH Day
Tushar Jagawat
मुझ में
मुझ में
हिमांशु Kulshrestha
दर्द की धुन
दर्द की धुन
Sangeeta Beniwal
उजले दिन के बाद काली रात आती है
उजले दिन के बाद काली रात आती है
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
हिन्दी पर विचार
हिन्दी पर विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तुम्हारी आँखें...।
तुम्हारी आँखें...।
Awadhesh Kumar Singh
2478.पूर्णिका
2478.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
चांद सी चंचल चेहरा 🙏
चांद सी चंचल चेहरा 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
I hope you find someone who never makes you question your ow
I hope you find someone who never makes you question your ow
पूर्वार्थ
रुसवा हुए हम सदा उसकी गलियों में,
रुसवा हुए हम सदा उसकी गलियों में,
Vaishaligoel
कम्प्यूटर ज्ञान :- नयी तकनीक- पावर बी आई
कम्प्यूटर ज्ञान :- नयी तकनीक- पावर बी आई
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
Loading...