Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Aug 2023 · 1 min read

■ स्वाद के छह रसों में एक रस “कड़वा” भी है। जिसे सहज स्वीकारा

■ स्वाद के छह रसों में एक रस “कड़वा” भी है। जिसे सहज स्वीकारा जाना आवश्यक है।

1 Like · 119 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कैसी
कैसी
manjula chauhan
अपनी मिट्टी की खुशबू
अपनी मिट्टी की खुशबू
Namita Gupta
"मुस्कान"
Dr. Kishan tandon kranti
23/218. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/218. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
प्रेम।की दुनिया
प्रेम।की दुनिया
भरत कुमार सोलंकी
* चली रे चली *
* चली रे चली *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
फितरत
फितरत
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
वैसे तो चाय पीने का मुझे कोई शौक नहीं
वैसे तो चाय पीने का मुझे कोई शौक नहीं
Sonam Puneet Dubey
Learn the things with dedication, so that you can adjust wel
Learn the things with dedication, so that you can adjust wel
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
उसके नाम के 4 हर्फ़ मेरे नाम में भी आती है
उसके नाम के 4 हर्फ़ मेरे नाम में भी आती है
Madhuyanka Raj
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
shabina. Naaz
" वाई फाई में बसी सबकी जान "
Dr Meenu Poonia
आइये, तिरंगा फहरायें....!!
आइये, तिरंगा फहरायें....!!
Kanchan Khanna
दोस्ती
दोस्ती
Neeraj Agarwal
*अभिनंदन के लिए बुलाया, है तो जाना ही होगा (हिंदी गजल/ गीतिक
*अभिनंदन के लिए बुलाया, है तो जाना ही होगा (हिंदी गजल/ गीतिक
Ravi Prakash
प्रिय
प्रिय
The_dk_poetry
शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
गम   तो    है
गम तो है
Anil Mishra Prahari
इस बुझी हुई राख में तमाम राज बाकी है
इस बुझी हुई राख में तमाम राज बाकी है
कवि दीपक बवेजा
🙅एग्जिट पोल का सार🙅
🙅एग्जिट पोल का सार🙅
*प्रणय प्रभात*
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
जिंदगी में रंग भरना आ गया
जिंदगी में रंग भरना आ गया
Surinder blackpen
"New year की बधाई "
Yogendra Chaturwedi
दृष्टिकोण
दृष्टिकोण
Dhirendra Singh
Indulge, Live and Love
Indulge, Live and Love
Dhriti Mishra
नर नारी
नर नारी
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मेरा अभिमान
मेरा अभिमान
Aman Sinha
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
कभी कभी ज़िंदगी में लिया गया छोटा निर्णय भी बाद के दिनों में
Paras Nath Jha
झूठ के सागर में डूबते आज के हर इंसान को देखा
झूठ के सागर में डूबते आज के हर इंसान को देखा
इंजी. संजय श्रीवास्तव
व्यवहार वह सीढ़ी है जिससे आप मन में भी उतर सकते हैं और मन से
व्यवहार वह सीढ़ी है जिससे आप मन में भी उतर सकते हैं और मन से
Ranjeet kumar patre
Loading...