Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Jun 2016 · 1 min read

ज़िन्दगी बन कर कहानी रह गई

ज़िन्दगी बन कर कहानी रह गई
ज्यूँ बुढ़ापे सी जवानी रह गई

दर दरीचे खोल दे घर बार के
अब नहीं बिटिया सयानी रह गई

नाव कागज़ की चलायेंगे कहाँ?
देख गंगा तक बे-पानी रह गई

झूठ अपनी शान में मदहोश है
कटघरे में सच बयानी रह गई

पेट भर कर और का भूखे मरें
इस वतन में यूँ किसानी रह गई

बात मत कर अब ज़मीरों की यहाँ
जब तवायफ राज-रानी रह गई

लाख बातें कर के आया हूँ उसे
अब भी कुछ उसको सुनानी रह गई

मौज में दुनिया है , बामुश्किल मगर
मुददतों से, बस दिवानी रह गई

2 Comments · 265 Views
You may also like:
बरसात की झड़ी ।
Buddha Prakash
पता नहीं तुम कौनसे जमाने की बात करते हो
Manoj Tanan
मीठी जलेबी
rekha mohan
निखरे मौसम में भी, स्याह बादल चले आते हैं, भरते...
Manisha Manjari
“सावधान व्हाट्सप्प मित्र ”
DrLakshman Jha Parimal
✍️दूरियाँ वो भी सहता है ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
चिरकाल तक लहराता अपना तिरंगा रहे
Suryakant Angara Kavi official
💐💐तुलसीदासमहाभागस्य भावः💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
वो पुरानी सी दीवारें
शांतिलाल सोनी
माना तुम्हारे मुकाबिल नहीं मैं ...
डॉ.सीमा अग्रवाल
आर्य (कुंडलिया)
Ravi Prakash
उपहार
विजय कुमार अग्रवाल
यशोधरा के प्रश्न गौतम बुद्ध से
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
वतन की बात
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
बेचूराम
Shekhar Chandra Mitra
साक्षात्कार:- कृषि क्षेत्र के हित के लिए "आईएएस" के तर्ज...
Deepak Kumar Tyagi
Writing Challenge- आरंभ (Beginning)
Sahityapedia
पंछी ने एक दिन उड़ जाना है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
#दोहे #अवधेश_के_दोहे
Awadhesh Saxena
मेरे माता-पिता
Shyam Sundar Subramanian
पिता का आशीष
Prabhudayal Raniwal
तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
Dr Archana Gupta
जंगल की सैर
जगदीश लववंशी
'घायल मन'
पंकज कुमार कर्ण
काश तुम
Dr fauzia Naseem shad
😊 आज की बात :-
*Author प्रणय प्रभात*
|| संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानदेव) || 🙏🏻🙇
Pravesh Shinde
*నమో గణేశ!*
विजय कुमार 'विजय'
तख़्ता डोल रहा
Dr. Sunita Singh
बेटी दिवस की बधाई
बिमल तिवारी “आत्मबोध”
Loading...