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18 Jun 2018 · 1 min read

#ग़ज़ल-45

बहर–फ़ाइलातुन-फ़यलातुन-फ़ेलुन
2122-1122-22

हारना याद नहीं जीते ग़म
नाज़ है आज़ खुदी पर है दम/1

जो झुका हार गया खुद से ही
ज़िंदगी हार मनाता मातम/2

हार पर यार बहाना तेरा
जीत पर फूल कहे हम हैं हम/3

एक ही सार रहे पलपल सुन
चाँद तो चाँद बढ़े या हो कम/4

ज़िंदगी आँख-मिचौली होती
धूप या छाँव रहे हो ना सम/5

मौज कर छोड़ उदासी दिल से
रीत पल बीत न आए प्रीतम/6

आर.एस.”प्रीतम”

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