Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Mar 2023 · 1 min read

अब समन्दर को सुखाना चाहते हैं लोग

हर किसी को हर किसी से प्रॉब्लम है अब
सिर्फ लड़ने का बहाना चाहते हैं लोग

ऐटमी हथियार के साए में रहकर भी
हर तरफ मौसम सुहाना चाहते हैं लोग

अम्न के जुमले सजाकर होंठ पर अपने
पीठ पर खंज़र चलाना चाहते हैं लोग

कौन रहना चाहता है ख़ुशदिली में अब
हर जगह झगड़ा बढ़ाना चाहते हैं लोग

झील और तालाब नदिया हो गए सब खेत
अब समंदर को सुखाना चाहते हैं लोग

–शिवकुमार बिलगरामी

1 Like · 761 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
साक्षात्कार एक स्वास्थ्य मंत्री से [ व्यंग्य ]
साक्षात्कार एक स्वास्थ्य मंत्री से [ व्यंग्य ]
कवि रमेशराज
राम लला की हो गई,
राम लला की हो गई,
sushil sarna
वास्तविक मौज
वास्तविक मौज
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
पहाड़ पर बरसात
पहाड़ पर बरसात
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
అమ్మా దుర్గా
అమ్మా దుర్గా
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
विश्व कप
विश्व कप
Pratibha Pandey
गाली भी बुरी नहीं,
गाली भी बुरी नहीं,
*प्रणय प्रभात*
"इंसानियत"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रेम पीड़ा
प्रेम पीड़ा
Shivkumar barman
*नज़ाकत या उल्फत*
*नज़ाकत या उल्फत*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जो रिश्ते दिल में पला करते हैं
जो रिश्ते दिल में पला करते हैं
शेखर सिंह
ओ त्याग मुर्ति माँ होती है
ओ त्याग मुर्ति माँ होती है
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
*रात से दोस्ती* ( 9 of 25)
*रात से दोस्ती* ( 9 of 25)
Kshma Urmila
दोहा-
दोहा-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सुबह-सुबह की लालिमा
सुबह-सुबह की लालिमा
Neeraj Agarwal
"मेरी बेटी है नंदिनी"
Ekta chitrangini
घर छूटा तो बाकी के असबाब भी लेकर क्या करती
घर छूटा तो बाकी के असबाब भी लेकर क्या करती
Shweta Soni
स्वाधीनता संग्राम
स्वाधीनता संग्राम
Prakash Chandra
कृष्ण सा हैं प्रेम मेरा
कृष्ण सा हैं प्रेम मेरा
The_dk_poetry
मुहब्बत ने मुहब्बत से सदाक़त सीख ली प्रीतम
मुहब्बत ने मुहब्बत से सदाक़त सीख ली प्रीतम
आर.एस. 'प्रीतम'
आत्मा
आत्मा
Bodhisatva kastooriya
23/25.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/25.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
तुम्हें अकेले चलना होगा
तुम्हें अकेले चलना होगा
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
सब तो उधार का
सब तो उधार का
Jitendra kumar
वक्त
वक्त
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
सिर्फ पार्थिव शरीर को ही नहीं बल्कि जो लोग जीते जी मर जाते ह
सिर्फ पार्थिव शरीर को ही नहीं बल्कि जो लोग जीते जी मर जाते ह
पूर्वार्थ
मिलना तो होगा नही अब ताउम्र
मिलना तो होगा नही अब ताउम्र
Dr Manju Saini
मैं तुम्हें लिखता रहूंगा
मैं तुम्हें लिखता रहूंगा
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
मन के भाव हमारे यदि ये...
मन के भाव हमारे यदि ये...
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
पूरा कुनबा बैठता, खाते मिलकर धूप (कुंडलिया)
पूरा कुनबा बैठता, खाते मिलकर धूप (कुंडलिया)
Ravi Prakash
Loading...