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3 Oct 2016 · 1 min read

स्वप्नलोक

महज स्वपनलोक की सैर से उत्पन्न कविता

सदियों से एक सपना है…
कहो पूरा करोगे तुम ?
भूल जाओ मेरे सिवा सब कुछ ….
कहो ऐसा करोगे तुम…?

नही कुछ और तमन्ना,के बस मेरे हो जाओ तुम
कभी ना छोड़ के जाओगे….
कहो ऐसा करोगे तुम….?

फकत एक लफ्ज सुनने को,कई बरसों से तरसी हूँ
मुझे अपना बना लो…..
कहो ऐसा करोगे तुम…?

Language: Hindi
1 Like · 1 Comment · 504 Views
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