Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jan 2024 · 2 min read

स्त्री न देवी है, न दासी है

स्त्री न देवी है, न दासी है
न प्रसन्नता की मूरत
न उदासी है।
न चंडी है, न काली
न ममता की मूरत
न ईश्वर की सूरत
नारी केवल श्रद्धा है
यह भी सच आधा है
नारी को कनक कली सी कामिनी
कहने में भी बाधा है
वह नीर भरी दुख की बदली
भी नहीं ही है
न आंचल में दूध और
आंखों में पानी ही
उसकी कहानी है
पुरुषों का बताया स्वरूप नहीं
नारी की पहचान
नारी से जानिए
नारी को उसके असल
रूप में पहचानिए
नारी है एक मां
बिलकुल वैसे ही जैसे
पुरुष पिता है
नारी है एक बहन
जैसे पुरुष है भाई
नारी पत्नी भी है
क्योंकि पुरुष पति है
वह प्रेयसी है
अपने प्रेमी नर की
वह डॉक्टर है, अफसर है
प्रोफेसर है, वैज्ञानिक भी है
खेतों में खटती किसान है
मजदूर है, विद्वान है
नेत्री है, अभिनेत्री है
व्यापारी और कवयित्री है
चलाती है कार भी
उड़ाती है जहाज भी
सड़कों पर ट्रैफिक भी
करती नियंत्रित है
पुलिस में अफसर है
फौज की सिपाही है
और तो और चोर, डाकू
व हत्यारी, जालसाज भी है नारी
वो सब कुछ जो होता है
या हो सकता है पुरुष
सब कुछ होती और
हो सकती है नारी
ममतमयी, दयालु, सहायिका
प्रेम की मूरत, ईश्वर की सूरत
हो सकता और होता है
पुरुष भी
फिर क्यों ताकतवर नारी को
मर्दानी व भावुक पुरुष को
जनाना कहकर पुकारते हो?
क्यों दो इंसानों को
अलग-अलग सीमाओं
में बांधते हो?
अर्द्धनारीश्वर को पूजने वाले तुम
स्त्री में पुरुष और पुरुष में स्त्री
देख कर हंसते क्यों हो?
जिस दिन पुरुष तुम्हारी
परिभाषा के अनुसार पूरा पुरुष
और स्त्री उसी परिभाषा से
पूर्ण स्त्री हो जाएगी
उस दिन सृष्टि
नष्ट हो जाएगी
क्योंकि दोनों को
एक दूसरे का पूरक
केवल कहा नहीं जाता
वे होते हैं
और अधूरे इंसान
पूरे काम नहीं
कर सकते हैं।

डॉ. मंजु सिंह गुप्ता

Language: Hindi
1 Like · 41 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कई आबादियों में से कोई आबाद होता है।
कई आबादियों में से कोई आबाद होता है।
Sanjay ' शून्य'
मुस्कराते हुए गुजरी वो शामे।
मुस्कराते हुए गुजरी वो शामे।
कुमार
मां मेरे सिर पर झीना सा दुपट्टा दे दो ,
मां मेरे सिर पर झीना सा दुपट्टा दे दो ,
Manju sagar
बड़े भाग मानुष तन पावा
बड़े भाग मानुष तन पावा
आकांक्षा राय
वृक्ष बन जाओगे
वृक्ष बन जाओगे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
सतत् प्रयासों से करें,
सतत् प्रयासों से करें,
sushil sarna
हर पल ये जिंदगी भी कोई ख़ास नहीं होती।
हर पल ये जिंदगी भी कोई ख़ास नहीं होती।
Phool gufran
समझ
समझ
Dinesh Kumar Gangwar
आइये तर्क पर विचार करते है
आइये तर्क पर विचार करते है
शेखर सिंह
"मकर संक्रान्ति"
Dr. Kishan tandon kranti
तौबा ! कैसा यह रिवाज
तौबा ! कैसा यह रिवाज
ओनिका सेतिया 'अनु '
नन्ही मिष्ठी
नन्ही मिष्ठी
Manu Vashistha
“गुप्त रत्न”नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है,
“गुप्त रत्न”नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है,
गुप्तरत्न
कुछ लिखूँ ....!!!
कुछ लिखूँ ....!!!
Kanchan Khanna
विपक्ष से सवाल
विपक्ष से सवाल
Shekhar Chandra Mitra
तेरी यादों के आईने को
तेरी यादों के आईने को
Atul "Krishn"
सभी गम दर्द में मां सबको आंचल में छुपाती है।
सभी गम दर्द में मां सबको आंचल में छुपाती है।
सत्य कुमार प्रेमी
संतुलित रहें सदा जज्बात
संतुलित रहें सदा जज्बात
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
है नसीब अपना अपना-अपना
है नसीब अपना अपना-अपना
VINOD CHAUHAN
*आपको सब ज्ञान है यह, आपका अभिमान है 【हिंदी गजल/गीतिका】*
*आपको सब ज्ञान है यह, आपका अभिमान है 【हिंदी गजल/गीतिका】*
Ravi Prakash
ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी,
Santosh Shrivastava
देश काल और परिस्थितियों के अनुसार पाखंडियों ने अनेक रूप धारण
देश काल और परिस्थितियों के अनुसार पाखंडियों ने अनेक रूप धारण
विमला महरिया मौज
मछलियां, नदियां और मनुष्य / मुसाफ़िर बैठा
मछलियां, नदियां और मनुष्य / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
चाहत
चाहत
Bodhisatva kastooriya
23/100.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/100.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी
नन्दलाल सुथार "राही"
■ बस, एक ही अनुरोध...
■ बस, एक ही अनुरोध...
*Author प्रणय प्रभात*
टूटी ख्वाहिश को थोड़ी रफ्तार दो,
टूटी ख्वाहिश को थोड़ी रफ्तार दो,
Sunil Maheshwari
Loading...