Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Jun 2023 · 1 min read

सोनेवानी के घनघोर जंगल

सोनेवानी के घनघोर और कठिन जंगल
विभिन्न वनस्पतियों से आच्छादित जंगल
टेढ़े मेढ़े पहाड़ी रास्तों से भरे अटपटे जंगल
हरी-भरी घनी झाड़ियों पेड़ों से पटे जंगल

न वाहनों का शोर न वन का ओर छोर
बस नाचे मन मोर मिलेंगे जंगल घनघोर
खुश कर देंगे मोड़ बिल्कुल न होंगे बोर
कहीं शांति चारों ओर कहीं पंछियों का शोर

पंछियों की यहां सुनाई देती है चहचहाट
महसूस होती है कभी शेर के आने की आहट
दिख जाए तो दिल में होने लगती है घबराहट
ओम तन बदन में होने लगती है थरथराहट

ओम प्रकाश भारती ओम्

Language: Hindi
1 Like · 155 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
💐प्रेम कौतुक-502💐
💐प्रेम कौतुक-502💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हर कोरे कागज का जीवंत अल्फ़ाज़ बनना है मुझे,
हर कोरे कागज का जीवंत अल्फ़ाज़ बनना है मुझे,
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
सृजन के जन्मदिन पर
सृजन के जन्मदिन पर
Satish Srijan
"मौत से क्या डरना "
Yogendra Chaturwedi
समस्त देशवाशियो को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्म जयंती की हार
समस्त देशवाशियो को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्म जयंती की हार
Ranjeet kumar patre
रिश्तों की कसौटी
रिश्तों की कसौटी
VINOD CHAUHAN
*जीतेंगे इस बार चार सौ पार हमारे मोदी जी (हिंदी गजल)*
*जीतेंगे इस बार चार सौ पार हमारे मोदी जी (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
तुम मेरी
तुम मेरी
Dr fauzia Naseem shad
एक कविता उनके लिए
एक कविता उनके लिए
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
दिल की पुकार है _
दिल की पुकार है _
Rajesh vyas
*मन राह निहारे हारा*
*मन राह निहारे हारा*
Poonam Matia
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
shabina. Naaz
जब हम सोचते हैं कि हमने कुछ सार्थक किया है तो हमें खुद पर गर
जब हम सोचते हैं कि हमने कुछ सार्थक किया है तो हमें खुद पर गर
ललकार भारद्वाज
याद  में  ही तो जल रहा होगा
याद में ही तो जल रहा होगा
Sandeep Gandhi 'Nehal'
#सामयिक_व्यंग्य...
#सामयिक_व्यंग्य...
*Author प्रणय प्रभात*
हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का;
हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का;
पूर्वार्थ
"अनाज"
Dr. Kishan tandon kranti
3231.*पूर्णिका*
3231.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
फिर पर्दा क्यूँ है?
फिर पर्दा क्यूँ है?
Pratibha Pandey
*फूलों मे रह;कर क्या करना*
*फूलों मे रह;कर क्या करना*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
🙏
🙏
Neelam Sharma
जितना आपके पास उपस्थित हैं
जितना आपके पास उपस्थित हैं
Aarti sirsat
कुछ तुम कहो जी, कुछ हम कहेंगे
कुछ तुम कहो जी, कुछ हम कहेंगे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मुद्दों की बात
मुद्दों की बात
Shekhar Chandra Mitra
आभा पंखी से बढ़ी ,
आभा पंखी से बढ़ी ,
Rashmi Sanjay
तुम पतझड़ सावन पिया,
तुम पतझड़ सावन पिया,
लक्ष्मी सिंह
हार का पहना हार
हार का पहना हार
Sandeep Pande
जिसनें जैसा चाहा वैसा अफसाना बना दिया
जिसनें जैसा चाहा वैसा अफसाना बना दिया
Sonu sugandh
सफर की महोब्बत
सफर की महोब्बत
Anil chobisa
तूफ़ान और मांझी
तूफ़ान और मांझी
DESH RAJ
Loading...