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Jul 28, 2016 · 1 min read

सागर उदास है

उस सागर की क्या

बात सुनाऊँ

वो आजकल उदास रहता है।

किनारों से दूर है

सीपियों के पास रहता है

वक्त के घोंघें

चुनता है

स्वप्नों के मूंगे

बुनता है

ज्वार की उत्तंग लहरों को

भाटे का द्वार कहता है।

कुछ कहूँ अगर तो

रोकता गुस्साता है

मेरे मौन पर

हँसता मुस्काता है

मेरी पीड़ा ओढ़ कर

मेरे आँसुओं के साथ

बहता है।
उस सागर की
क्या बात सुनाऊँ
वो आजकल
उदास रहता है।

1 Like · 2 Comments · 328 Views
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