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18 Nov 2019 · 1 min read

सर्द मौसम में तेरी गुनगुनी याद

जब भी सर्द मौसम में तेरी,
गुनगुनी याद सरसराती है ।
इन्द्रधनुष को खिलाने के लिये,
बादलों से धूप टपक जाती है ।।

जब कभी वक़्त की गली,
तेरी याद दोहराती है ।
आंखों के सूने से कोठर में,
बरसात ठहर जाती है ।।

मुस्कुराहट सहसा ही,
आ जाती है अधरों पर ।
जब कहीं से कानों में तेरी,
आवाज़ खनक जाती है ।।

इन्द्रधनुष को खिलाने के लिये,
बादलों से धूप टपक जाती है ।।

@ नील पदम्

Language: Hindi
5 Likes · 2 Comments · 538 Views
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