Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Nov 2022 · 1 min read

*संविधान गीत*

तुमने गर्दिश में भी हर्ष लिखा,
हर पिछड़े का संघर्ष लिखा।
अनगिनत यातना झेली पर,
विचलित न किंतु तनक दिखा।
तूफां में जो बन बाज़ उड़ा, ऐसे थे भीम महान।
हर ग्रंथ से पावन है, मेरे भारत का संविधान।।

दहलीजों में कैद ताड़ना,
लायक तुलसी की नारी।
या देवों की दासी थी या,
सिर मुडवाती बेचारी।।
धर्म ग्रंथ की रीतों ने जो,
जिंदा जला दयी नारी।
संविधान के बल पर वो ही,
आज शनि पर हैं भारी।।
हर बेड़ी को काट कलम से लौटाया सम्मान।
हर ग्रंथ से पावन है मेरे भारत का संविधान।।

आस्तीन के साँप हैं कुछ,
जो गरल दबाये बैठे हैं।
कुछ जयचंद्र विभीषण तो,
कुछ सकुनि जाये बैठे हैं ।।
तुम लड़े हमें भी है लड़ना,
सामंती सोच की बेड़ियों से।
जो करे तिरंगे को भगवा,
ऐसे उन चंद भेड़ियों से।।
अधिकारों को शस्त्र बना कर्तव्यों को ईमान ।
हर ग्रंथ से पावन है मेरे भारत का संविधान।।

पंचशील के शीलों में हर,
मानव का उत्थान छिप।
सारनाथ के स्तम्भों में,
बुद्ध का वो विज्ञान छिपा।।
सत्य अहिंसा से आलोकित,
विश्व धरा करने वाले।
तक्षशिला और नालंदा में,
विश्व ज्ञान भरने वाले।।
सर्वधर्म सद्भाव जगाता दिल में स्वाभिमान।
हर ग्रंथ से पावन है मेरे भारत का संविधान।।
✍ *कवि लोकेन्द्र ज़हर*
9887777459
नोट :- कृपया मूल रूप में ही फॉरवर्ड करें। कापीराईट सुरक्षित हैं।

Language: Hindi
Tag: कविता, गीत
3 Likes · 2 Comments · 22 Views
You may also like:
ज़िंदगी की हक़ीक़त से
Dr fauzia Naseem shad
जन्म दिन का खास तोहफ़ा।
Taj Mohammad
"वफादार शेरू"
Godambari Negi
✍️फिर भी लगाव✍️
'अशांत' शेखर
छठ महापर्व
श्री रमण 'श्रीपद्'
*मिला कहीं से एक पटाखा (बाल कविता)*
Ravi Prakash
प्रश्न चिन्ह
Shyam Sundar Subramanian
आत्मविश्वास
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
कारण मेरा भोलापन
Satish Srijan
बदल दी
जय लगन कुमार हैप्पी
भारत के बुद्धिजीवी
Shekhar Chandra Mitra
दूर रहकर तुमसे जिंदगी सजा सी लगती है
Ram Krishan Rastogi
क्या हार जीत समझूँ
सूर्यकांत द्विवेदी
स्वागत बा श्री मान
आकाश महेशपुरी
नसीब
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
" मेरी प्यारी नींद"
Dr Meenu Poonia
मुकम्मल जहां
Seema 'Tu hai na'
इम्तिहान की घड़ी
Aditya Raj
अपना राह तुम खुद बनाओ
Anamika Singh
मैंने रोक रखा है चांद
Kaur Surinder
अब रुक जाना कहां है
कवि दीपक बवेजा
सत्य विचार (पंचचामर छंद)
Rambali Mishra
समय देकर तो देखो
Shriyansh Gupta
रावण पुतला दहन और वह शिशु
राकेश कुमार राठौर
करपात्री जी का श्राप...
मनोज कर्ण
दोहावली...(११)
डॉ.सीमा अग्रवाल
रिश्तों पर नाज़
shabina. Naaz
■ बधाई कोई रेवड़ी नहीं!
*Author प्रणय प्रभात*
रिश्ते
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
एक ठहरा ये जमाना
Varun Singh Gautam
Loading...