Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Oct 2022 · 1 min read

शेर

परस्तिश किया कि सलामत रहो
हमारी न सही किसी की अमानत तो हो.

Language: Hindi
276 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Rajiv Vishal (Rohtasi)
View all
You may also like:
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
स्वागत है  इस नूतन का  यह वर्ष सदा सुखदायक हो।
स्वागत है इस नूतन का यह वर्ष सदा सुखदायक हो।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
ख्वाब उसका पूरा नहीं हुआ
ख्वाब उसका पूरा नहीं हुआ
gurudeenverma198
हाई रे मेरी तोंद (हास्य कविता)
हाई रे मेरी तोंद (हास्य कविता)
Dr. Kishan Karigar
होता नहीं कम काम
होता नहीं कम काम
जगदीश लववंशी
चलो...
चलो...
Srishty Bansal
दिल के दरवाजे भेड़ कर देखो - संदीप ठाकुर
दिल के दरवाजे भेड़ कर देखो - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
यूं आंखों से ओझल हो चली हो,
यूं आंखों से ओझल हो चली हो,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
राजनीति
राजनीति
Dr. Pradeep Kumar Sharma
पंचवर्षीय योजनाएँ
पंचवर्षीय योजनाएँ
Dr. Kishan tandon kranti
Activities for Environmental Protection
Activities for Environmental Protection
अमित कुमार
🙅ताज़ा सुझाव🙅
🙅ताज़ा सुझाव🙅
*प्रणय प्रभात*
*अग्रसेन ने ध्वजा मनुज, आदर्शों की फहराई (मुक्तक)*
*अग्रसेन ने ध्वजा मनुज, आदर्शों की फहराई (मुक्तक)*
Ravi Prakash
सीख (नील पदम् के दोहे)
सीख (नील पदम् के दोहे)
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
लम्हों की तितलियाँ
लम्हों की तितलियाँ
Karishma Shah
योग का गणित और वर्तमान समस्याओं का निदान
योग का गणित और वर्तमान समस्याओं का निदान
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
कर सकता नहीं ईश्वर भी, माँ की ममता से समता।
कर सकता नहीं ईश्वर भी, माँ की ममता से समता।
डॉ.सीमा अग्रवाल
बिखरने की सौ बातें होंगी,
बिखरने की सौ बातें होंगी,
Vishal babu (vishu)
पूर्वोत्तर का दर्द ( कहानी संग्रह) समीक्षा
पूर्वोत्तर का दर्द ( कहानी संग्रह) समीक्षा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
विधा - गीत
विधा - गीत
Harminder Kaur
जन्म दायनी माँ
जन्म दायनी माँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
पापा की गुड़िया
पापा की गुड़िया
Dr Parveen Thakur
माँ वीणा वरदायिनी, बनकर चंचल भोर ।
माँ वीणा वरदायिनी, बनकर चंचल भोर ।
जगदीश शर्मा सहज
चौमासा विरहा
चौमासा विरहा
लक्ष्मी सिंह
ख्वाबों में मिलना
ख्वाबों में मिलना
Surinder blackpen
सारी रोशनी को अपना बना कर बैठ गए
सारी रोशनी को अपना बना कर बैठ गए
कवि दीपक बवेजा
*बदलाव की लहर*
*बदलाव की लहर*
sudhir kumar
अरे धर्म पर हंसने वालों
अरे धर्म पर हंसने वालों
Anamika Tiwari 'annpurna '
"" *भारत माता* ""
सुनीलानंद महंत
मेरी सच्चाई को बकवास समझती है
मेरी सच्चाई को बकवास समझती है
Keshav kishor Kumar
Loading...