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11 Aug 2023 · 1 min read

“शहर की याद”

“शहर की याद”
गाँव में रहकर भी
शहर की याद आती है,
शहर की सरपट जिन्दगी
मुझको अब न भाती है।
ऐ शहर, तू ये बता
हर शय क्यों दौड़ता है,
दिन में बित्ते भर रहते
रात में क्यों फैलता है?

8 Likes · 3 Comments · 154 Views
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