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22 Jul 2016 · 1 min read

वक़्त की ताकत !

वक़्त ही सबको हँसाता, वक़्त ही सबको रुलाता
वक़्त ही कुछ घाव देकर, वक़्त ही मरहम लगाता,
वक़्त ने छीन ली है, खुद्दारों से उनकी खुद्दारी
वक़्त ने ही छीन ली है, मक्कारों से उनकी मक्कारी ..

जब वक़्त बुरा होगा तेरा, अपने भी भाव नहीं देंगें
जो पूँछ हिलाते कल तक थे, मूछों पर ताव वही देंगें,
जब वक़्त बुरा होगा तेरा, अपने भी छाव नहीं देंगें
तू जिसके दुख़ में रोया था, अब तुझको घाव वही देंगें..

वक़्त हार हैं, वक़्त जीत है, खिलाडी तो माध्यम बन जाता
‘क्रिकेट का भगवान’ कभी, जीरो पर आउट हो जाता,
हाँ वक़्त परोसे ताज तख्त, और वक़्त चुरा भी लेता है
उँचे उठे अहंकारी को, वक़्त गिरा भी देता है.

इक वक़्त था, जब किसी से प्यारी सी मुलाकात हुई
इक वक़्त है, उनसे मिलना; नामुमकिन सी बात हुई,
है समय प्रबल, जो मिलन-विरह का खेल रचाया करता है
हालातों के आगे ताकतवर झुक जाया करता है …

– नीरज चौहान की कलम से ..
लिखित : 10-3-2015

Language: Hindi
Tag: कविता
2 Comments · 387 Views
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