Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Jan 2017 · 1 min read

वैश्या

एक नया रूप
नारी का देखो
कभी थी बेटी 
किसी आँगन की
जो बिक गयी 
दानव के हाथो
एक नया रूप 
मानव का देखो

कोठे में बैठी
किये सिंगार 
बिक रहा जिस्म 
हर रात है देखो

नारी का यह 
अवतार तो देखो
रोता ह्दय 
चहरे पर मुस्कान
यह देखो
एक नया रूप
नारी का देखो (आशु)

Language: Hindi
1 Like · 295 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बेलन टांग दे!
बेलन टांग दे!
Dr. Mahesh Kumawat
ज़िंदगी जीने के लिये क्या चाहिए.!
ज़िंदगी जीने के लिये क्या चाहिए.!
शेखर सिंह
■ मी एसीपी प्रद्युम्न बोलतोय 😊😊😊
■ मी एसीपी प्रद्युम्न बोलतोय 😊😊😊
*प्रणय प्रभात*
प्यार दीवाना ही नहीं होता
प्यार दीवाना ही नहीं होता
Dr Archana Gupta
बच्चों को बच्चा रहने दो
बच्चों को बच्चा रहने दो
Manu Vashistha
अपनी सरहदें जानते है आसमां और जमीन...!
अपनी सरहदें जानते है आसमां और जमीन...!
Aarti sirsat
हैं जो कुछ स्मृतियां वो आपके दिल संग का
हैं जो कुछ स्मृतियां वो आपके दिल संग का
दीपक झा रुद्रा
"पता सही होता तो"
Dr. Kishan tandon kranti
आया पर्व पुनीत....
आया पर्व पुनीत....
डॉ.सीमा अग्रवाल
हे पिता
हे पिता
अनिल मिश्र
यूं ही नहीं मैंने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा है,
यूं ही नहीं मैंने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
गीत।। रूमाल
गीत।। रूमाल
Shiva Awasthi
विश्व पुस्तक दिवस पर
विश्व पुस्तक दिवस पर
Mohan Pandey
परिश्रम
परिश्रम
ओंकार मिश्र
आसमान तक पहुंचे हो धरती पर हो पांव
आसमान तक पहुंचे हो धरती पर हो पांव
नूरफातिमा खातून नूरी
त्रेतायुग-
त्रेतायुग-
Dr.Rashmi Mishra
मोबाइल
मोबाइल
Punam Pande
हँस लो! आज  दर-ब-दर हैं
हँस लो! आज दर-ब-दर हैं
गुमनाम 'बाबा'
नौकरी
नौकरी
Rajendra Kushwaha
मैं अक्सर उसके सामने बैठ कर उसे अपने एहसास बताता था लेकिन ना
मैं अक्सर उसके सामने बैठ कर उसे अपने एहसास बताता था लेकिन ना
पूर्वार्थ
बावला
बावला
Ajay Mishra
मित्र
मित्र
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
घबराना हिम्मत को दबाना है।
घबराना हिम्मत को दबाना है।
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
कितना आसान है न बुद्ध बनना, अपनी दूधमुंही संतान को और सोती ह
कितना आसान है न बुद्ध बनना, अपनी दूधमुंही संतान को और सोती ह
Neelam Sharma
*सॉंसों में जिसके बसे, दशरथनंदन राम (पॉंच दोहे)*
*सॉंसों में जिसके बसे, दशरथनंदन राम (पॉंच दोहे)*
Ravi Prakash
((((((  (धूप ठंढी मे मुझे बहुत पसंद है))))))))
(((((( (धूप ठंढी मे मुझे बहुत पसंद है))))))))
Rituraj shivem verma
देखो ना आया तेरा लाल
देखो ना आया तेरा लाल
Basant Bhagawan Roy
3031.*पूर्णिका*
3031.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
संसार का स्वरूप(3)
संसार का स्वरूप(3)
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
*_......यादे......_*
*_......यादे......_*
Naushaba Suriya
Loading...