Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2017 · 2 min read

विजेता

आज आप पढिए विजेता उपन्यास की पृष्ठ संख्या चार।
वह खामोश था परन्तु उसके अंदर एक तूफान-सा उठ खड़ा हुआ था। भाभी द्वारा कहे गए शब्द उसे अब भी कचोट रहे थे। उसे यूं चुप देख बाला उलझन में पड़ गई। उसने खुद से ही कहा,”यें गए तो थे बड़े राज्जी होके पर आए सैं मुँह लटकाके। इसी के बात होगी?” वह अपने पति के पास जाकर बोली,”गोलू नहीं आई?”
“ना।”
“नहाई ना होगी।”
“वा ना आवै भाग्यवान।”
“क्यूं ना आवै?”
अपने पति के मुँह से कोई उत्तर न पाकर बाला फिर से बोली,”के बात होगी?” शमशेर अब भी चुप था। उसे एक दिशा में ताकते देख बाला ने जरा तैश में आकर कहा,” बोलते क्यूं ना थाहम? थाहरे चेहरे पै बारा क्यों बज रहे सैं?”
अपनी पत्नी की यह बात सुनते ही शमशेर जैसे उबल पड़ा,”ईब तूं इतणी हेजली बणगी उनकी। इतणा ए प्यार था तो साझे म्ह क्यूं ना रही? कम तैं कम मैं धोखेबाज, बेईमान तो ना बणता उनकी नजर म्ह।”
अपने पति के इस जवाब से बाला सब समझ गई। वे जब अलग हुए थे तो उसकी जेठानी ने बाला के पीहर तक उन दोनों की बुराई की थी। सभी रिश्तेदारियों में पति-पत्नी ने यह ढोल पीट दिया था कि शमशेर अपनी पत्नी का गुलाम है। वे शमशेर को मतलबी, धोखेबाज जैसे नामों से बदनाम करने लगे थे। उस वक्त उन दोनों को लगता था कि भाई-भाभी उन्हें अपने से दूर नहीं देखना चाहते, इसलिए ऐसा कह रहे हैं परन्तु आज बाला को यह अहसास हो गया था कि उनका उस वक्त का रोना विरह-दुख न होकर पगार का लालच था वरना वे मेल-मिलाप की इस पहल का स्वागत करते।
+ +भाग दो + +
शमशेर के गाँव से लगभग एक सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक अन्य गाँव में राजाराम वकील का घर स्थित है। राजाराम की पत्नी नीमो एक धार्मिक महिला है और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना उसकी आदत में शुमार है। उनके घर के बाहरी हिस्से में एक बैठक है जहाँ नीमो आग,हारे व हुक्के का प्रबंध रखती है। यहाँ गाँव के बुजुर्ग हुक्के का दम भरते हुए विभिन्न प्रकार के विषयों पर वार्तालाप करते रहते हैं। जब नीमो इस घर में आई थी तो राजाराम का आंगन बच्चों की किलकारियों से गूंजता रहता था। राजाराम भी कभी-कभी उन बच्चों संग मस्ती कर लेता था।

Language: Hindi
1 Like · 221 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ज़िंदगी  ने  अब  मुस्कुराना  छोड़  दिया  है
ज़िंदगी ने अब मुस्कुराना छोड़ दिया है
Bhupendra Rawat
💐प्रेम कौतुक-391💐
💐प्रेम कौतुक-391💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
परिस्थितीजन्य विचार
परिस्थितीजन्य विचार
Shyam Sundar Subramanian
माटी कहे पुकार
माटी कहे पुकार
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सॉप और इंसान
सॉप और इंसान
Prakash Chandra
जो ख्वाब में मिलते हैं ...
जो ख्वाब में मिलते हैं ...
लक्ष्मी सिंह
ले चल मुझे भुलावा देकर
ले चल मुझे भुलावा देकर
Dr Tabassum Jahan
विषय :- काव्य के शब्द चुनाव पर |
विषय :- काव्य के शब्द चुनाव पर |
Sûrëkhâ Rãthí
*मौका मिले मित्र जिस क्षण भी, निज अभिनंदन करवा लो (हास्य मुक
*मौका मिले मित्र जिस क्षण भी, निज अभिनंदन करवा लो (हास्य मुक
Ravi Prakash
हर एक चोट को दिल में संभाल रखा है ।
हर एक चोट को दिल में संभाल रखा है ।
Phool gufran
अधखिली यह कली
अधखिली यह कली
gurudeenverma198
जीवन अप्रत्याशित
जीवन अप्रत्याशित
पूर्वार्थ
खिलते फूल
खिलते फूल
Punam Pande
याद तो हैं ना.…...
याद तो हैं ना.…...
Dr Manju Saini
इतना क्यों व्यस्त हो तुम
इतना क्यों व्यस्त हो तुम
Shiv kumar Barman
न हिन्दू बुरा है
न हिन्दू बुरा है
Satish Srijan
वीर वैभव श्रृंगार हिमालय🏔️⛰️🏞️🌅
वीर वैभव श्रृंगार हिमालय🏔️⛰️🏞️🌅
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
चिट्ठी   तेरे   नाम   की, पढ़ लेना सरकार।
चिट्ठी तेरे नाम की, पढ़ लेना सरकार।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
2327.पूर्णिका
2327.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
वक्त से लड़कर अपनी तकदीर संवार रहा हूँ।
वक्त से लड़कर अपनी तकदीर संवार रहा हूँ।
सिद्धार्थ गोरखपुरी
■ सीधी बात, नो बकवास...
■ सीधी बात, नो बकवास...
*Author प्रणय प्रभात*
"ये जिन्दगी"
Dr. Kishan tandon kranti
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
DrLakshman Jha Parimal
रंगों की सुखद फुहार
रंगों की सुखद फुहार
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
नौ फेरे नौ वचन
नौ फेरे नौ वचन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
आपातकाल
आपातकाल
Shekhar Chandra Mitra
धुप मे चलने और जलने का मज़ाक की कुछ अलग है क्योंकि छाव देखते
धुप मे चलने और जलने का मज़ाक की कुछ अलग है क्योंकि छाव देखते
Ranjeet kumar patre
मातृभूमि तुझ्रे प्रणाम
मातृभूमि तुझ्रे प्रणाम
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बरसों की ज़िंदगी पर
बरसों की ज़िंदगी पर
Dr fauzia Naseem shad
कविता -
कविता - "सर्दी की रातें"
Anand Sharma
Loading...