Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Apr 2023 · 1 min read

राम काज में निरत निरंतर

राम काज में निरत निरंतर,अंतस में सियाराम हैं
सत चित आनंद बल बुद्धि, और विद्या के धाम हैं
राम चरण में निरत सदा,अजर अमर हनुमान हैं
साधु संत दीन हीन प़िय, भक्तों के कृपा निधान हैं
कोटि कोटि जनमन में बैठे, सदा निरत सतकाम हैं
युगों युगों से भक्त जनों को, बांट रहे सुख धाम हैं
सज्जन को पालक पोषक प्रिय, दुष्टों को महाकाल हैं
ज्ञान भक्ति और कर्म योग में,निरत सदा त्रिकाल हैं
रोग दोष दुख भंजक जग में, कृपा सिंधु हनुमान हैं
राम नाम और काज प़िय, बालवीर हनुमान हैं
ग्राम कस्बा और महानगर में, खेड़ापति हनुमान हैं
धर्म और शुभ कर्म के रक्षक, कलयुग में हनुमान हैं
राम काज में निरत निरंतर, अंतस में सियाराम हैं
जय सियाराम जी 🙏🎉
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

Language: Hindi
2 Likes · 416 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from सुरेश कुमार चतुर्वेदी
View all
You may also like:
कागज ए ज़िंदगी............एक सोच
कागज ए ज़िंदगी............एक सोच
Neeraj Agarwal
जितनी बार भी तुम मिली थी ज़िंदगी,
जितनी बार भी तुम मिली थी ज़िंदगी,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
23)”बसंत पंचमी दिवस”
23)”बसंत पंचमी दिवस”
Sapna Arora
सादगी तो हमारी जरा……देखिए
सादगी तो हमारी जरा……देखिए
shabina. Naaz
खुशनुमा – खुशनुमा सी लग रही है ज़मीं
खुशनुमा – खुशनुमा सी लग रही है ज़मीं
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*पहले वाले  मन में हैँ ख़्यालात नहीं*
*पहले वाले मन में हैँ ख़्यालात नहीं*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
22, *इन्सान बदल रहा*
22, *इन्सान बदल रहा*
Dr .Shweta sood 'Madhu'
चाय दिवस
चाय दिवस
Shyam Vashishtha 'शाहिद'
क्या अब भी किसी पे, इतना बिखरती हों क्या ?
क्या अब भी किसी पे, इतना बिखरती हों क्या ?
The_dk_poetry
किरायेदार
किरायेदार
Keshi Gupta
घाव बहुत पुराना है
घाव बहुत पुराना है
Atul "Krishn"
कहानी इश्क़ की
कहानी इश्क़ की
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
सवालात कितने हैं
सवालात कितने हैं
Dr fauzia Naseem shad
जुदाई की शाम
जुदाई की शाम
Shekhar Chandra Mitra
ईमेल आपके मस्तिष्क की लिंक है और उस मोबाइल की हिस्ट्री आपके
ईमेल आपके मस्तिष्क की लिंक है और उस मोबाइल की हिस्ट्री आपके
Rj Anand Prajapati
*शुभ रात्रि हो सबकी*
*शुभ रात्रि हो सबकी*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
अपनापन
अपनापन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
-- फिर हो गयी हत्या --
-- फिर हो गयी हत्या --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
मेरी आँखों में देखो
मेरी आँखों में देखो
हिमांशु Kulshrestha
न मां पर लिखने की क्षमता है
न मां पर लिखने की क्षमता है
पूर्वार्थ
धरा हमारी स्वच्छ हो, सबका हो उत्कर्ष।
धरा हमारी स्वच्छ हो, सबका हो उत्कर्ष।
surenderpal vaidya
जन्म दिवस
जन्म दिवस
Aruna Dogra Sharma
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
शाम
शाम
N manglam
#मंगलकामनाएं
#मंगलकामनाएं
*प्रणय प्रभात*
#करना है, मतदान हमको#
#करना है, मतदान हमको#
Dushyant Kumar
एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती,
एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती,
प्रेमदास वसु सुरेखा
2449.पूर्णिका
2449.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
काश! मेरे पंख होते
काश! मेरे पंख होते
Adha Deshwal
आपत्तियाँ फिर लग गयीं (हास्य-व्यंग्य )
आपत्तियाँ फिर लग गयीं (हास्य-व्यंग्य )
Ravi Prakash
Loading...