Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Sep 23, 2022 · 1 min read

ये उम्मीद की रौशनी, बुझे दीपों को रौशन कर जातीं हैं।

क़ायनात की साजिशें कुछ यूँ भी रंग लातीं हैं,
की किसी अपने का साथ, मिटा कर चली जाती हैं।
वादे तोड़ने की कोशिशों में, जब नाक़ाम हो जातीं हैं,
तो सांसें चुराकर, बेख़ौफ़ मुस्कुराती हैं।
हंसती आँखों के सपनों को, बेवक़्त रौंद जातीं हैं,
और जीवन को स्याह रातों के, दलदल में छोड़ आतीं हैं।
रौशनी की आस में, नये अंधेरों में भटक जातीं हैं,
और फिर ज़िन्दगी, ज़िन्दगी के नाम से भी ख़ौफ़ खाती है।
उम्मीद की अंतिम डोर भी, जब आँखें चुरा कर चली जातीं हैं,
बस उसी पल वो आवाज़, हर बंधन तोड़ कानों में गूंज जाती है।
तेरी आँखों से हीं तो मेरी, सोई आँखें दुनिया देख पातीं हैं,
और तेरी मुस्कुराहटें, मेरे वज़ूद को ज़िंदा कर जातीं हैं।
क्यों मेरी यादें, तुम्हें इतना रुलाकर जातीं हैं,
जबकि मेरी सांसें तो, तेरी साँसों में हीं घुलकर जिये जातीं हैं।
ये उम्मीद की रौशनी बुझे दीपों को रौशन कर जातीं हैं,
और ज़िन्दगी को एक बार, फिर से जीने को आतुर हो जाती है।

3 Likes · 4 Comments · 63 Views
You may also like:
मन
शेख़ जाफ़र खान
दामन भी अपना
Dr fauzia Naseem shad
प्रात का निर्मल पहर है
मनोज कर्ण
पिता हैं धरती का भगवान।
Vindhya Prakash Mishra
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
बदलते हुए लोग
kausikigupta315
मेरे पिता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
मुँह इंदियारे जागे दद्दा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल रखे है,
Vaishnavi Gupta
मैं तो सड़क हूँ,...
मनोज कर्ण
वरिष्ठ गीतकार स्व.शिवकुमार अर्चन को समर्पित श्रद्धांजलि नवगीत
ईश्वर दयाल गोस्वामी
पिता अब बुढाने लगे है
n_upadhye
'याद पापा आ गये मन ढाॅंपते से'
Rashmi Sanjay
Life through the window during lockdown
ASHISH KUMAR SINGH
✍️सच बता कर तो देखो ✍️
Vaishnavi Gupta
ख़्वाब सारे तो
Dr fauzia Naseem shad
दो जून की रोटी
Ram Krishan Rastogi
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
जीवन में
Dr fauzia Naseem shad
बुन रही सपने रसीले / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
One should not commit suicide !
Buddha Prakash
ख़्वाहिशें बे'लिबास थी
Dr fauzia Naseem shad
हैं पिता, जिनकी धरा पर, पुत्र वह, धनवान जग में।।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
बरसात की छतरी
Buddha Prakash
कैसे मैं याद करूं
Anamika Singh
इश्क
Anamika Singh
तुमसे कोई शिकायत नही
Ram Krishan Rastogi
पापा
सेजल गोस्वामी
प्राकृतिक आजादी और कानून
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
रहे इहाँ जब छोटकी रेल
आकाश महेशपुरी
Loading...