Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jun 2016 · 1 min read

मोक्ष भी

काव्य साधना न व्यर्थ है कभी सदैव जान
ये मनुष्य को सदा मनुष्यता सिखाती हैI
शारदा कृपा विशेष हो तभी मिले कवित्व
छन्दसिद्धि देवतुल्य आज भी बनाती हैI
दीन या निराश चित्त में यही भरे उमंग
और अंग अंग मध्य चेतना जगाती हैI
छन्द शास्त्र ज्ञान युक्त जो हुआ प्रवीण मित्र
ये विधा महान मोक्ष भी उसे दिलाती हैII
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Language: Hindi
Tag: कविता
304 Views
You may also like:
मजबूर दिल की ये आरजू
VINOD KUMAR CHAUHAN
दामोदर लीला
Pooja Singh
आदमी आदमी के रोआ दे
आकाश महेशपुरी
"कारगिल विजय दिवस"
Lohit Tamta
“ सर्वे संतु निरामया”
DrLakshman Jha Parimal
कौन उठाए आवाज, आखिर इस युद्ध तंत्र के खिलाफ?
AJAY AMITABH SUMAN
इश्क कोई बुरी बात नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
अजब रिकार्ड
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
इतना आसां कहां
कवि दीपक बवेजा
गोपालक श्रीकृष्ण: कुंडलिया
Ravi Prakash
पूर्वज
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
एक घर था...
सूर्यकांत द्विवेदी
चाँद ......
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
छठ गीत (भोजपुरी)
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
ईद अल अजहा
Awadhesh Saxena
इन्साफ
Alok Saxena
गज़ल
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
ख्वाहिशों ठहरो जरा
Satish Srijan
तीर्थ यात्रा
विशाल शुक्ल
मैं आ रहा हूं ना बस यही बताना चाहतें हो...
★ IPS KAMAL THAKUR ★
ज़िंदगी का सवाल होते हैं ।
Dr fauzia Naseem shad
ज़मीर की आवाज़
Shekhar Chandra Mitra
ज़िन्दगी मैं चाल तेरी अब समझती जा रही हूँ
Dr Archana Gupta
मेरी बेटी मेरी सहेली
लक्ष्मी सिंह
रक्षाबंधन भाई बहन का त्योहार
Ram Krishan Rastogi
अहसान मानता हूं।
Taj Mohammad
आजकल इश्क नही 21को शादी है
Anurag pandey
हिन्दू धर्म और अवतारवाद
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
ग़ज़ल
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
✍️ताला और चाबी✍️
'अशांत' शेखर
Loading...