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2 Feb 2024 · 1 min read

*मैंने देखा है * ( 18 of 25 )

मैंने देखा है

मैंने बाती को, सूर्य में ढ़लते देखा है
सूर्य को संघर्ष मे, जलते देखा है …

उम्मीद की सुबह ,कर्म की दोपहर देखीं
जीत को हर शाम, ढ़लते देखा है …

मैंने देखा सोच से परे, कुछ सोचते
सितारे को जमी पर ,टहलते देखा है …

कुछ ख्वाब ,मायूसियों में डूबे हुए थे
उन्हें हकीकत की ऒर बढ़ते देखा है …

मैंने देखा जीवन के ,हर कहर को
भाग्य से डट कर ,झगड़ते देखा है …

सच से दमकते, देखा एक चहरा
हर रोज़ उसे ,पढ़ कर देखा है …

– क्षमा उर्मिला

3 Likes · 94 Views
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