Oct 7, 2016 · 1 min read

मेरा आंचल

आंचल गर बेरंग हो तो उम्मीद रहती है
गर हो जाये बदरंग तो क्या कीजे

जो गुनाह किया नही,उसकी सजा पाई है
अब खता कर लूं, फिर सजा कडी दीजे

उल्फत की नहीं दरकार, मन पत्थर सा रखना तुम
अब कोई हम तेरे , दिल जिसपर पसीजे

तेरे नकली सपनों से अाखें जख्मी रहती है
आप दूसरा ख्वाब कोई सजा लीजे

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