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14 Feb 2017 · 1 min read

मुक्तक

शाम ढल गयी है मगर रात रह गयी है!
मेरी चन्द लम्हों की बात रह गयी है!
किसतरह मैं रोक दूँ यादों का कारवाँ?
तेरे दर्द की अभी सौगात रह गयी है!

#महादेव_की_कविताऐं’

Language: Hindi
217 Views
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