Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Jan 2017 · 1 min read

माँ के लिए बेटियां

?????
मॉ के लिए बेटियां
ईश्वर का दिया हुआ,
वह अनमोल उपहार है,
जिसमें
वह अपना बचपन जीती है,
अपने सपने,
अपना अरमान,
पूरे होते देखती है,
जो उसे नहीं मिला
उसमे पूर्ण होती है।
?लक्ष्मी सिंह ?

2 Likes · 530 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from लक्ष्मी सिंह
View all
You may also like:
और चौथा ???
और चौथा ???
SHAILESH MOHAN
मूर्ख जनता-धूर्त सरकार
मूर्ख जनता-धूर्त सरकार
Shekhar Chandra Mitra
जवान वो थी तो नादान हम भी नहीं थे,
जवान वो थी तो नादान हम भी नहीं थे,
जय लगन कुमार हैप्पी
जो लोग बिछड़ कर भी नहीं बिछड़ते,
जो लोग बिछड़ कर भी नहीं बिछड़ते,
शोभा कुमारी
डॉ. नामवर सिंह की रसदृष्टि या दृष्टिदोष
डॉ. नामवर सिंह की रसदृष्टि या दृष्टिदोष
कवि रमेशराज
सिंदूर 🌹
सिंदूर 🌹
Ranjeet kumar patre
खवाब है तेरे तु उनको सजालें
खवाब है तेरे तु उनको सजालें
Swami Ganganiya
गोर चराने का मज़ा, लहसुन चटनी साथ
गोर चराने का मज़ा, लहसुन चटनी साथ
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बेइंतहा सब्र बक्शा है
बेइंतहा सब्र बक्शा है
Dheerja Sharma
मुफलिसो और बेकशों की शान में मेरा ईमान बोलेगा।
मुफलिसो और बेकशों की शान में मेरा ईमान बोलेगा।
Phool gufran
बे-आवाज़. . . .
बे-आवाज़. . . .
sushil sarna
भाग्य - कर्म
भाग्य - कर्म
Buddha Prakash
ਰੁੱਤ ਵਸਲ ਮੈਂ ਵੇਖੀ ਨਾ
ਰੁੱਤ ਵਸਲ ਮੈਂ ਵੇਖੀ ਨਾ
Surinder blackpen
*लव इज लाईफ*
*लव इज लाईफ*
Dushyant Kumar
ओम के दोहे
ओम के दोहे
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
कैसे भुल जाऊ उस राह को जिस राह ने मुझे चलना सिखाया
कैसे भुल जाऊ उस राह को जिस राह ने मुझे चलना सिखाया
Shakil Alam
तेरी मिट्टी के लिए अपने कुएँ से पानी बहाया है
तेरी मिट्टी के लिए अपने कुएँ से पानी बहाया है
'अशांत' शेखर
स्थाई- कहो सुनो और गुनों
स्थाई- कहो सुनो और गुनों
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
मुसाफिर हो तुम भी
मुसाफिर हो तुम भी
Satish Srijan
💐प्रेम कौतुक-240💐
💐प्रेम कौतुक-240💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कहां जाके लुकाबों
कहां जाके लुकाबों
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मंतर मैं पढ़ूॅंगा
मंतर मैं पढ़ूॅंगा
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
आज हमने उनके ऊपर कुछ लिखने की कोशिश की,
आज हमने उनके ऊपर कुछ लिखने की कोशिश की,
Vishal babu (vishu)
सन्मति औ विवेक का कोष
सन्मति औ विवेक का कोष
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दो शरारती गुड़िया
दो शरारती गुड़िया
Prabhudayal Raniwal
बिन फले तो
बिन फले तो
surenderpal vaidya
👌फार्मूला👌
👌फार्मूला👌
*Author प्रणय प्रभात*
कितना अच्छा है मुस्कुराते हुए चले जाना
कितना अच्छा है मुस्कुराते हुए चले जाना
Rohit yadav
*खाओ गरम कचौड़ियॉं, आओ यदि बृजघाट (कुंडलिया)*
*खाओ गरम कचौड़ियॉं, आओ यदि बृजघाट (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
फितरत
फितरत
Dr fauzia Naseem shad
Loading...