Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 May 2023 · 1 min read

बूढ़ा बरगद का पेड़ बोला (मार्मिक कविता)

बूढा बरगद का पेड़ बोला

मेरी ही टहनियों को काटकर
छाँव की तलाश में भटक रहे लोग
कराहते हुए कहीं यहीं पर जैसे
बूढा बरगद का पेड़ बोला.

कुछ याद है “किशन” की सभ भूल गए?
अपने दादाजी की अंगुलियाँ थामे
मुझसे मिलने तुम भी आते
वो मुझसे और तुम चिड़ियों से बतियाते.

मेरी डाल पे बैठे
वो चिड़ियों की टोली
हम सभी अरोसी-पड़ोसी बन जाते
बतियाते और कितनी खुशियां बाँटते.

तुम सभी ने काट दी मेरी टहनियाँ
अब उन चिड़ियों के घर भी उजाड़ दिए
दर्द से कराह रहा मैं कब से
पर कोई नहीं सुनता.

अब कोई भी ईधर को नहीं आता
न ही कोई पेड़ लगाता
कराहते हुए यहीं पर जैसे
बूढा बरगद का पेड़ बोला.

ठंडी हवा, मीठे फल, धूप-छाँव
सब कुछ मैं तुम सबको देता
खुद जहरीला कार्बन पीकर रह लेता
पर शुद्ध ऑक्सीजन सभी को देता.

फिर भी अंधाधुंद बृक्षों को काट रहे
प्रकृति की दी हुई चिजें उजाड़ रहे
पर्यावरण सरंक्षण की कौन सोचे?
बूढा बरगद का पेड़ बोला.

कवि- किशन कारीगर
(कॉपीराइट@ सर्वाधिकार सुरक्षित)

Language: Hindi
2 Likes · 1013 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan Karigar
View all
You may also like:
मुफ्तखोरी
मुफ्तखोरी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सफलता और सुख  का मापदण्ड स्वयं निर्धारित करनांआवश्यक है वरना
सफलता और सुख का मापदण्ड स्वयं निर्धारित करनांआवश्यक है वरना
Leena Anand
ना कहीं के हैं हम - ना कहीं के हैं हम
ना कहीं के हैं हम - ना कहीं के हैं हम
Basant Bhagawan Roy
वृक्ष की संवेदना
वृक्ष की संवेदना
Dr. Vaishali Verma
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
तुम्हारा दिल ही तुम्हे आईना दिखा देगा
तुम्हारा दिल ही तुम्हे आईना दिखा देगा
VINOD CHAUHAN
#एक_कविता
#एक_कविता
*Author प्रणय प्रभात*
करवा चौथ@)
करवा चौथ@)
Vindhya Prakash Mishra
तारीफ....... तुम्हारी
तारीफ....... तुम्हारी
Neeraj Agarwal
"रियायत के रंग"
Dr. Kishan tandon kranti
*बहू- बेटी- तलाक*
*बहू- बेटी- तलाक*
Radhakishan R. Mundhra
*भूमिका (श्री सुंदरलाल जी: लघु महाकाव्य)*
*भूमिका (श्री सुंदरलाल जी: लघु महाकाव्य)*
Ravi Prakash
है जरूरी हो रहे
है जरूरी हो रहे
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
2732. 🌷पूर्णिका🌷
2732. 🌷पूर्णिका🌷
Dr.Khedu Bharti
13, हिन्दी- दिवस
13, हिन्दी- दिवस
Dr Shweta sood
मातृदिवस
मातृदिवस
Satish Srijan
दौड़ते ही जा रहे सब हर तरफ
दौड़ते ही जा रहे सब हर तरफ
Dhirendra Singh
प्रेम जब निर्मल होता है,
प्रेम जब निर्मल होता है,
हिमांशु Kulshrestha
आह
आह
Pt. Brajesh Kumar Nayak
आखिर कब तक ?
आखिर कब तक ?
Dr fauzia Naseem shad
*****जीवन रंग*****
*****जीवन रंग*****
Kavita Chouhan
बोध
बोध
Dr.Pratibha Prakash
अनिल
अनिल "आदर्श "
अनिल "आदर्श"
कभी ना अपने लिए जीया मैं…..
कभी ना अपने लिए जीया मैं…..
AVINASH (Avi...) MEHRA
कया बताएं 'गालिब'
कया बताएं 'गालिब'
Mr.Aksharjeet
बारिश की संध्या
बारिश की संध्या
महेश चन्द्र त्रिपाठी
भाई बहन का प्रेम
भाई बहन का प्रेम
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
यादें
यादें
Tarkeshwari 'sudhi'
कलाकृति बनाम अश्लीलता।
कलाकृति बनाम अश्लीलता।
Acharya Rama Nand Mandal
मेरे खाते में भी खुशियों का खजाना आ गया।
मेरे खाते में भी खुशियों का खजाना आ गया।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...