Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Feb 2017 · 3 min read

“बुलंदप्रभा” में आलोकित तेवरीकार रमेशराज +डॉ. अभिनेष शर्मा

“बुलंदप्रभा” में आलोकित तेवरीकार रमेशराज
+डॉ. अभिनेष शर्मा
———————————————————-
साहित्यिक पत्रिका “बुलंदप्रभा” का जुलाई-सितम्बर-2015 अंक तेवरीकार रमेशराज जी के साहित्य-सृजन को समेटकर शोभायमान है | इस अंक में तेवरीकार श्री रमेशराज ने अपनी बात को स्पष्टरूप से रखकर साहित्याकाश में अपना स्थान और दैदीप्तमान कर लिया है |
कविता को हर कवि अपने ही अंदाज में सजाता है, संवारता है और उसे गुनगुनाने का मौका देता है | तभी तो कविता सभी रसों में डूबकर इठलाती है और गद्य से ऊपर तरजीह पाती है | कभी कविता यथार्थ की वैतरणी पार करती है तो कभी विद्रोह की आग सुलगाती है | कभी जन की दुखाद्र पुकार सुनकर करुणरस में घनीभूत होती है तो कभी सौन्दर्य की अनुपम छटा बिखेरती है |
तेवरी में अलग ही रस के दर्शन होते हैं और वह है-“विरोधरस” | हर तेवरीकार इसी रस को अपने-अपने दृष्टिकोण से शब्दांकित करने का अथक प्रयास करता है | तेवरीकार रमेशराज भी इस प्रयास में शत-प्रतिशत खरे उतरते हैं | उनका हर तेवरी-संग्रह विरोधरस में ओजस है | अलीगढ़ को तेवरी से पहचान दिलाने वाले इस संघर्षशील व्यक्तित्व का हार्दिक धन्यवाद | धन्यवाद “ बुलंदप्रभा” के सम्पादकमंडल का भी जिसने साहित्य-मनीषी रमेशराज और उनके साहित्य पर आधारित अंक निकालकर साहित्य-जगत में उनकी रचनाधर्मिता खासतौर पर तेवरी और उनके द्वारा अन्वेषित “ विरोधरस “ को विचार-विमर्श हेतु विद्वजनों के सम्मुख रखा |
आमजन की स्थिति आज जिस आक्रोश और बौखलाहट की विस्फोटक अवस्था में है, उसे शब्दों का पहनावा तेवरी के रूप में मिलता है | तेवरी के अतिरिक्त बुलंदप्रभा के इस अंक में श्री रमेशराज द्वारा रचित अन्य विधाएं जैसे ग़ज़ल, गीत, मुक्तक, दोहे, कुंडलिया, कहानी, लेख आदि को भी स्थान मिला है | इसके अतिरिक्त अनेक साहित्यकारों के रमेशराज के व्यक्तित्व और कृतित्व से संदर्भित आलेख हैं | उनसे जुड़े साहित्यकारों ने भी उनके अंदर के व्यक्ति से मुलाकात कराने में इन आलेखों में कोई कोताही नहीं बरती है | उनसे जितना जिसने पाया है, इन आलेखों में उसे सूद सहित लौटाया है | बुलंदप्रभा के इस अंक से गुजरते हुए यह स्पष्टरूप से कहा जा सकता है कि रमेशराज जी को हर विधा में महारत हासिल है | हर विषय की गहरायी तक जाकर मन के उद्गारों को शब्दों में ढालने की कला की कसौटी पर आप पूरी तरह खरे उतरते हैं |
अंक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है श्री रमेशराज द्वारा अन्वेषित एक नए रस “विरोधरस ” की प्रस्तुति | विरोधरस के संचारी, स्थायी भाव, अनुभाव पर विस्तृत चर्चा की गयी है | साथ ही इस रस के रूप व प्रकार भी सूक्ष्मता के साथ समझाये गये हैं | सम्भवतः श्री राज ने तेवरी काव्य में रस की समस्या को हल करने के उद्देश्य से विरोधरस की साहित्य में स्थापना की है |
तेवरी में चूंकि जन की पीड़ित दमित भावनाएं परिलक्षित होती हैं अतः इस विधा में बहने वाले आक्रोश और विरोध को हर आस्वादक ऐसे महसूस करता है जैसे उसके मन की ही बात की जा रही हो | अगर यह आम धारणा है कि क्रोध अँधा होता है , राज जी ने विरोधरस के माध्यम से इसी क्रोध को आँखें और कान प्रदान करते हुए बताया है कि विरोध हिंसा का पर्याय नहीं | अनीति और हिंसा का प्रतिरोधात्म्क स्वरूप विरोध है | एक तेवरीकार शब्दों को आक्रोश के साथ विरोधरस में डुबोकर ऐसे प्रस्तुत करता है कि उसकी तेवरी हर अनीति के प्रति असहमति जताने लगती है |
रमेशराज का साहित्य अनेक पुष्पों से सजा सुवासित आलय है जिसे ‘ बुलंदप्रभा’ ने और बुलंदियों तक पहुँचाने का सत्प्रयास किया है |
———————————————————————
डॉ.अभिनेष शर्मा, देव हॉस्पिटल, खिरनी गेट , अलीगढ़
मोबा.-9837503132

Language: Hindi
Tag: लेख
375 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
यह कौन सी तहजीब है, है कौन सी अदा
यह कौन सी तहजीब है, है कौन सी अदा
VINOD CHAUHAN
जरूरी तो नहीं
जरूरी तो नहीं
Madhavi Srivastava
जो घर जारै आपनो
जो घर जारै आपनो
Dr MusafiR BaithA
ये खुदा अगर तेरे कलम की स्याही खत्म हो गई है तो मेरा खून लेल
ये खुदा अगर तेरे कलम की स्याही खत्म हो गई है तो मेरा खून लेल
Ranjeet kumar patre
*सुंदर दिखना अगर चाहते, भजो राम का नाम (गीत)*
*सुंदर दिखना अगर चाहते, भजो राम का नाम (गीत)*
Ravi Prakash
दो शे'र ( मतला और इक शे'र )
दो शे'र ( मतला और इक शे'र )
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
वन उपवन हरित खेत क्यारी में
वन उपवन हरित खेत क्यारी में
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
माशा अल्लाह, तुम बहुत लाजवाब हो
माशा अल्लाह, तुम बहुत लाजवाब हो
gurudeenverma198
"हँसिया"
Dr. Kishan tandon kranti
बंसत पचंमी
बंसत पचंमी
Ritu Asooja
परम प्रकाश उत्सव कार्तिक मास
परम प्रकाश उत्सव कार्तिक मास
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बोझ लफ़्ज़ों के दिल पे होते हैं
बोझ लफ़्ज़ों के दिल पे होते हैं
Dr fauzia Naseem shad
शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
2386.पूर्णिका
2386.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
संस्कार मनुष्य का प्रथम और अपरिहार्य सृजन है। यदि आप इसका सृ
संस्कार मनुष्य का प्रथम और अपरिहार्य सृजन है। यदि आप इसका सृ
Sanjay ' शून्य'
◆ आप भी सोचिए।
◆ आप भी सोचिए।
*प्रणय प्रभात*
आंगन की किलकारी बेटी,
आंगन की किलकारी बेटी,
Vindhya Prakash Mishra
उस रात .....
उस रात .....
sushil sarna
शक
शक
Paras Nath Jha
"भोर की आस" हिन्दी ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
कब मरा रावण
कब मरा रावण
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
यदि कोई सास हो ललिता पवार जैसी,
यदि कोई सास हो ललिता पवार जैसी,
ओनिका सेतिया 'अनु '
कुछ लोग
कुछ लोग
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
तनाव ना कुछ कर पाने या ना कुछ पाने की जनतोजहत  का नही है ज्य
तनाव ना कुछ कर पाने या ना कुछ पाने की जनतोजहत का नही है ज्य
पूर्वार्थ
गरीबी और लाचारी
गरीबी और लाचारी
Mukesh Kumar Sonkar
# जय.….जय श्री राम.....
# जय.….जय श्री राम.....
Chinta netam " मन "
वफ़ा
वफ़ा
shabina. Naaz
गुरु अंगद देव
गुरु अंगद देव
कवि रमेशराज
जो दिखाते हैं हम वो जताते नहीं
जो दिखाते हैं हम वो जताते नहीं
Shweta Soni
सोच
सोच
Shyam Sundar Subramanian
Loading...