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27 Jul 2016 · 1 min read

बारिश….

गज़ल

ग़मों का बोझ बढ़ाने को आ गई बारिश ,
हमारी जान जलाने को आ गई बारिश ।

किसी की याद को हमनें भुला के रखा था,
उसी की याद दिलाने को आ गई बारिश ।

जमीं को जितने अजब ज़ख्म दे गया सूरज,
उन्हीं की टीस बढ़ाने को आ गई बारिश ।

किताबे दिल पे तेरा नाम था लिखा हमनें ,
उसी के हर्फ़ मिटाने को आ गई बारिश ।

अभी तो “आरसी” आँखों में थी नमी बाकी ,
दुबारा आँख भिगाने को आ गई बारिश ।

– आर० सी० शर्मा “आरसी”

1 Comment · 430 Views
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