Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Oct 2022 · 1 min read

बहकने दीजिए

* गीतिका *
~~
आज कदमों को बहकने दीजिए।
चाहतों को पंख लगने दीजिए।

है खुला आकाश नीला सामने।
मुक्त पाखी को विचरने दीजिए।

घिर रहे जब मेघ श्यामल हर तरफ।
अब जरा पानी बरसने दीजिए।

चोट लगती राह में रुकना नहीं।
वक्त के सब घाव भरने दीजिए।

कौन है ठोकर जिसे लगती नहीं।
अब स्वयं को भी सँभलने दीजिए।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य, १८/१०/२०२२
मण्डी (हिमाचल प्रदेश)

1 Like · 1 Comment · 64 Views
You may also like:
लफ़्ज़ों में ढालना
Dr fauzia Naseem shad
जय हिन्द जय भारत
Swami Ganganiya
हासिल न कर सको
सिद्धार्थ गोरखपुरी
तिरंगे की ललकार हो
kumar Deepak "Mani"
भूला प्यार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
काँटों का दामन हँस के पकड़ लो
VINOD KUMAR CHAUHAN
सब से खूबसूरत
shabina. Naaz
जानती हूँ मैं की हर बार तुझे लौट कर आना...
Manisha Manjari
कहानी *"ममता"* पार्ट-3 लेखक: राधाकिसन मूंधड़ा, सूरत।
radhakishan Mundhra
हाथ मलना चाहिए था gazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
✍️मातारानी ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
■ सुविचार
*प्रणय प्रभात*
मजदूर- ए- औरत
AMRESH KUMAR VERMA
सिपाही
Buddha Prakash
कुंडलिया छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
*अफसर की मुस्कुराहट (कहानी)*
Ravi Prakash
Writing Challenge- वादा (Promise)
Sahityapedia
बात होती है सब नसीबों की।
सत्य कुमार प्रेमी
खुद से प्यार
लक्ष्मी सिंह
कैसा अलबेला इंसान हूँ मैं!
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
योगा
Utsav Kumar Aarya
मजदूर।
Anil Mishra Prahari
“ पुराने नये सौगात “
DrLakshman Jha Parimal
राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास
Ram Krishan Rastogi
✍️किसान की आत्मकथा✍️
'अशांत' शेखर
बारिश ए मोहब्बत।
Taj Mohammad
खेलता ख़ुद आग से है
Shivkumar Bilagrami
सदियों का छल
Shekhar Chandra Mitra
मै हिम्मत नही हारी
Anamika Singh
यही आदत ही तो
gurudeenverma198
Loading...