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8 Oct 2022 · 1 min read

बरसात

छाई घटा घनघोर
नाचे वन में मोर
देखो बरखा का जोर
शाम हो या होवे भोर
फैली हरीतिमा चहुंँ ओर
ललचाए मन का चोर
सुनो पवन का शोर
पवन पेड़ों को रही झकझोर
जल का कहीं ओर न छोर
प्रियतम बंधे प्रेम की डोर
पंछी ढूँढे अपना ठौर
ओम् ये बरसात का दौर

ओम प्रकाश भारती *ओम्”

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 68 Views
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