Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Feb 2023 · 1 min read

बचे जो अरमां तुम्हारे दिल में

बचे जो अरमां तुम्हारे दिल में,
उनको पूरा कर लो अब तुम।
अब ना हाथ आऊंगी तुम्हारे,
चाहे जितने जतन कर लो तुम।।

बचे जो तीर तरकस में तुम्हारे,
उनको बेशक चला लो तुम ।
दिए जो जख्म दिल में तुमने ,
कितना नमक लगा लो तुम।।

मैं अबला नहीं रही हूं अब
जिसे कभी सताते थे तुम।
मैं सबला बन चुकी हूं अब,
कितने ही प्रयत्न कर लो तुम।।

मिलता था चैन तुमको,
जब बेचैन करते थे तुम।
मै रोती रही पूरी जिंदगी,
जरा मुस्करा लो अब तुम।।

चलाए जो नैनो से बाण तुमने,
उनको कर लो अब कम तुम।
बहुत सताया है मुझे तुमने,
ढाओ न सितम अब और तुम।।

जा रही हूं आखरी मंजिल पे,
कफ़न उढ़ा दो अब तो तुम।
चलेंगे लोग सब पीछे मेरे,
बस कंधा दे देना अब तुम।।

भले ही अदृश्य हूं कफ़न में,
देख सकते है सब कुछ तुम।
अपना चेहरा दिखा दो मुझे,
मिल न पाएंगे कभी हम तुम।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

Language: Hindi
1 Like · 5 Comments · 315 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ram Krishan Rastogi
View all
You may also like:
संज्ञा
संज्ञा
पंकज कुमार कर्ण
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
जख्मो से भी हमारा रिश्ता इस तरह पुराना था
जख्मो से भी हमारा रिश्ता इस तरह पुराना था
कवि दीपक बवेजा
नारी का बदला स्वरूप
नारी का बदला स्वरूप
विजय कुमार अग्रवाल
कभी सरल तो कभी सख़्त होते हैं ।
कभी सरल तो कभी सख़्त होते हैं ।
Neelam Sharma
अजनबी !!!
अजनबी !!!
Shaily
23/184.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/184.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*ई-रिक्शा तो हो रही, नाहक ही बदनाम (छह दोहे)*
*ई-रिक्शा तो हो रही, नाहक ही बदनाम (छह दोहे)*
Ravi Prakash
नज़र को नज़रिए की तलाश होती है,
नज़र को नज़रिए की तलाश होती है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
पढ़ो लिखो आगे बढ़ो...
पढ़ो लिखो आगे बढ़ो...
डॉ.सीमा अग्रवाल
स्वयं से सवाल
स्वयं से सवाल
आनन्द मिश्र
गीत
गीत
प्रीतम श्रावस्तवी
"मोहे रंग दे"
Ekta chitrangini
रमेशराज के 2 मुक्तक
रमेशराज के 2 मुक्तक
कवि रमेशराज
"बेचैनियाँ"
Dr. Kishan tandon kranti
* मायने हैं *
* मायने हैं *
surenderpal vaidya
गाँव बदलकर शहर हो रहा
गाँव बदलकर शहर हो रहा
रवि शंकर साह
जहरीले धूप में (कविता )
जहरीले धूप में (कविता )
Ghanshyam Poddar
What can you do
What can you do
VINOD CHAUHAN
एक तुम्हारे होने से....!!!
एक तुम्हारे होने से....!!!
Kanchan Khanna
आजकल नहीं बोलता हूं शर्म के मारे
आजकल नहीं बोलता हूं शर्म के मारे
Keshav kishor Kumar
जेल जाने का संकट टले,
जेल जाने का संकट टले,
*प्रणय प्रभात*
Love is not about material things. Love is not about years o
Love is not about material things. Love is not about years o
पूर्वार्थ
कागज़ पे वो शब्दों से बेहतर खेल पाते है,
कागज़ पे वो शब्दों से बेहतर खेल पाते है,
ओसमणी साहू 'ओश'
गज़ल
गज़ल
सत्य कुमार प्रेमी
सुबह की चाय मिलाती हैं
सुबह की चाय मिलाती हैं
Neeraj Agarwal
नज़र में मेरी तुम
नज़र में मेरी तुम
Dr fauzia Naseem shad
जनक छन्द के भेद
जनक छन्द के भेद
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
प्रेरणा और पराक्रम
प्रेरणा और पराक्रम
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
विजेता
विजेता
Sanjay ' शून्य'
Loading...