Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Jan 2024 · 1 min read

बगिया

बगिया
रचनाकार :-डॉ विजय कुमार कन्नौजे छत्तीसगढ़ रायपुर
———-

क्या कसूर है किसी का, बगिया देख ललचा जायें।
कभी गुलाब कभी मोंगरा, कभी गेंदा पे नजर लग जायें।।

महर महर महकती बगियां,भौंरे करते गुंजार
चिड़ियां भी चहकती सुंदर,माली मिले हजार

लहलहाते झुमते कलियन, फुलों की अम्बार
कहीं केकती कहीं केवड़ा,की रगों में भरमार

न जाने कब कहां पर, भौंरा मन चला है जाये
क्या कसूर है किसी का , बगियां देख ललचा जाये

फुलों की कलियां में,है स्नेह भाव झलकता
मोरनी मोर मिलन देख ,कवि हृद धधकता

जीवन में पहली बार कवि, किसी बगियां में पहुंचा ।
कांटों का तार लगा देख ,मन मसोट कर लौटा।।

चिल्ला रही थी बगियां सुंदर,पुछ रही थी क्यों आये।
क्या कसूर है किसी का बगियां देख ललचा जाये।।

फुलों की वहां अम्बार लगी थी,सामने केवल गुलाब लगी थी।।
गुलाब ही है शायद,,कि रंगों में झुम रही थी,
मचलती इठलाती,लहराते हवा में उड़ रहीथी

कभी साहस, कभी भय, कभी कवि हृदय रोता है
कांटों का प्रवाह न करें,,उनका ही विजय होता है।

न जाने कब कहां पर, कौनसा आफत आ जाये।
क्या कसूर है किसी का, बगियां देख ललचा जाये।।

============================

Language: Hindi
1 Like · 55 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"कुछ रास्ते"
Dr. Kishan tandon kranti
"मां की ममता"
Pushpraj Anant
हरे कृष्णा !
हरे कृष्णा !
MUSKAAN YADAV
मन का महाभारत
मन का महाभारत
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सुकूं आता है,नहीं मुझको अब है संभलना ll
सुकूं आता है,नहीं मुझको अब है संभलना ll
गुप्तरत्न
आंखो के पलको पर जब राज तुम्हारा होता है
आंखो के पलको पर जब राज तुम्हारा होता है
Kunal Prashant
मैं तूफान हूँ जिधर से गुजर जाऊँगा
मैं तूफान हूँ जिधर से गुजर जाऊँगा
VINOD CHAUHAN
आज़ादी का जश्न
आज़ादी का जश्न
Shekhar Chandra Mitra
....प्यार की सुवास....
....प्यार की सुवास....
Awadhesh Kumar Singh
■ हर जगह मारा-मारी है जी अब। और कोई काम बचा नहीं बिना लागत क
■ हर जगह मारा-मारी है जी अब। और कोई काम बचा नहीं बिना लागत क
*Author प्रणय प्रभात*
परिवर्तन
परिवर्तन
Paras Nath Jha
कर्म का फल
कर्म का फल
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
विचार और रस [ दो ]
विचार और रस [ दो ]
कवि रमेशराज
If you get tired, learn to rest. Not to Quit.
If you get tired, learn to rest. Not to Quit.
पूर्वार्थ
छह घण्टे भी पढ़ नहीं,
छह घण्टे भी पढ़ नहीं,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
शायरी
शायरी
Jayvind Singh Ngariya Ji Datia MP 475661
अपने आप को ही सदा श्रेष्ठ व कर्मठ ना समझें , आपकी श्रेष्ठता
अपने आप को ही सदा श्रेष्ठ व कर्मठ ना समझें , आपकी श्रेष्ठता
Seema Verma
आसान कहां होती है
आसान कहां होती है
Dr fauzia Naseem shad
अंदाज़े बयाँ
अंदाज़े बयाँ
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
दिलों में प्यार भी होता, तेरा मेरा नहीं होता।
दिलों में प्यार भी होता, तेरा मेरा नहीं होता।
सत्य कुमार प्रेमी
तुम नफरत करो
तुम नफरत करो
Harminder Kaur
*मुर्गा (बाल कविता)*
*मुर्गा (बाल कविता)*
Ravi Prakash
यह तुम्हारी गलत सोच है
यह तुम्हारी गलत सोच है
gurudeenverma198
इश्क़ ला हासिल का हासिल कुछ नहीं
इश्क़ ला हासिल का हासिल कुछ नहीं
shabina. Naaz
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-150 से चुने हुए श्रेष्ठ 11 दोहे
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-150 से चुने हुए श्रेष्ठ 11 दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
द्रौपदी
द्रौपदी
SHAILESH MOHAN
"प्रेम -मिलन '
DrLakshman Jha Parimal
* काव्य रचना *
* काव्य रचना *
surenderpal vaidya
तेरा कंधे पे सर रखकर - दीपक नीलपदम्
तेरा कंधे पे सर रखकर - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Loading...