Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Jan 2024 · 1 min read

प्रेम 💌💌💕♥️

प्रेम नि:शब्द होता है|

असीमित गहराई से उभरकर,
सागर की लहरों – सा,
छलकते हुए भी,
ख्वाब समेटे हुए,
प्रेम नि:शब्द होता है||

बुदबुदाते होठों की तरह ,
जुडते- बिछुडते भी,
दाँतों की-सी मजबूती से,
निष्कंप है ,
प्रेम नि:शब्द होता है||

धड़कन की तरह,
धक-धक,
धड़कते हुए भी ,
पल-पल कंपित ,
पर !
अनेक जुडे ख्वाब संजोए ,
प्रेम नि:शब्द होता है||

लबों की बुदबुदाहट से,
साँसों की गर्माहट तक,
कुमुद – मंद मुस्कान में,
बसे एहसासों तक,
प्रेम नि:शब्द होता है||

मुस्कराते – खिलते,
फूलों की तरह,
मन के महके,
मनके – मोती ,
रस – रास की तरह,
प्रेम नि:शब्द होता है||

रोम-रोम में रमे,
राग की तरह,
गुलशन में बसे,
बहार की तरह,
पंकिल कमल के,
मुस्कान की तरह,
प्रेम नि:शब्द होता है||

झंकृत मन का,
साज – संगीत,
तन – सजा और मन रंजित,
सूखे मरू में,
झमाझम बारिश की तरह
प्रेम नि:शब्द होता है।।

2 Likes · 109 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बिन गुनाहों के ही सज़ायाफ्ता है
बिन गुनाहों के ही सज़ायाफ्ता है "रत्न"
गुप्तरत्न
चाँद को चोर देखता है
चाँद को चोर देखता है
Rituraj shivem verma
हेेे जो मेरे पास
हेेे जो मेरे पास
Swami Ganganiya
राम राम सिया राम
राम राम सिया राम
नेताम आर सी
कविता -
कविता - "करवा चौथ का उपहार"
Anand Sharma
#ग़ज़ल-
#ग़ज़ल-
*प्रणय प्रभात*
हिसाब-किताब / मुसाफ़िर बैठा
हिसाब-किताब / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
पतझड़
पतझड़
ओसमणी साहू 'ओश'
सबसे नालायक बेटा
सबसे नालायक बेटा
आकांक्षा राय
"रंगमंच पर"
Dr. Kishan tandon kranti
"" *सपनों की उड़ान* ""
सुनीलानंद महंत
कानून हो दो से अधिक, बच्चों का होना बंद हो ( मुक्तक )
कानून हो दो से अधिक, बच्चों का होना बंद हो ( मुक्तक )
Ravi Prakash
मिलन
मिलन
Gurdeep Saggu
भारत
भारत
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
उसकी खामोशियों का राज़ छुपाया मैंने।
उसकी खामोशियों का राज़ छुपाया मैंने।
Phool gufran
#शीर्षक-प्यार का शक्ल
#शीर्षक-प्यार का शक्ल
Pratibha Pandey
अपना ही ख़ैर करने लगती है जिन्दगी;
अपना ही ख़ैर करने लगती है जिन्दगी;
manjula chauhan
परम्परा को मत छोडो
परम्परा को मत छोडो
Dinesh Kumar Gangwar
Game of the time
Game of the time
Mangilal 713
पूरी निष्ठा से सदा,
पूरी निष्ठा से सदा,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
* थके पथिक को *
* थके पथिक को *
surenderpal vaidya
मैं मित्र समझता हूं, वो भगवान समझता है।
मैं मित्र समझता हूं, वो भगवान समझता है।
Sanjay ' शून्य'
गुरु गोविंद सिंह जी की बात बताऊँ
गुरु गोविंद सिंह जी की बात बताऊँ
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
#अज्ञानी_की_कलम
#अज्ञानी_की_कलम
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
जिंदगी के तूफानों में हर पल चिराग लिए फिरता हूॅ॑
जिंदगी के तूफानों में हर पल चिराग लिए फिरता हूॅ॑
VINOD CHAUHAN
खांचे में बंट गए हैं अपराधी
खांचे में बंट गए हैं अपराधी
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
बुरा नहीं देखेंगे
बुरा नहीं देखेंगे
Sonam Puneet Dubey
प्यारा सा स्कूल
प्यारा सा स्कूल
Santosh kumar Miri
कामयाबी का
कामयाबी का
Dr fauzia Naseem shad
भीम के दीवाने हम,यह करके बतायेंगे
भीम के दीवाने हम,यह करके बतायेंगे
gurudeenverma198
Loading...