Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 May 2022 · 1 min read

पिता के चरणों को नमन ।

पिता तुम्हारे चरणों को,
नमन करते बार-बार हैं ।

जन्म हुआ इस अद्भुत संसार में,
उसमें तुम्हारा आशीर्वाद है,
समर्पित किया अपने जीवन को,
ऐसा हृदय तुम्हारा विशाल है ।

पिता तुम्हारे चरणों को,
नमन करते बार-बार हैं ।।…..(१)

मेहनत करते निस्वार्थ भाव से,
ऐसे फलदार वृक्ष के समान हो,
तन-मन-धन सब अर्पित कर देते,
सागर से भी गहरा तुम्हारा प्यार है ।

पिता तुम्हारे चरणों को,
नमन करते बार-बार हैं ।।…..(२)

तुम्हारे चरणों की धूल हूंँ मैं,
कृपा तुम्हारी मेरे जीवन का आधार है,
जन्म-मरण के इस संसार में,
मेरे जीवन का करते उद्धार हो।

पिता तुम्हारे चरणों को,
नमन करते बार-बार हैं ।।….(३)

सुख की छाया हमको देते हो,
दुःख की गर्मी को तुम सहते रहते हो ,
कड़वा घूंँट तुम निगल लेते हो ,
अमृत का रस हमें देते हो ।

पिता तुम्हारे चरणों को,
नमन करते बार-बार हैं ।।…..(४)

नाम – बुद्ध प्रकाश,
शहर – मौदहा हमीरपुर ।

10 Likes · 10 Comments · 676 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Buddha Prakash
View all
You may also like:
*अहम ब्रह्मास्मि*
*अहम ब्रह्मास्मि*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पतंग को हवा की दिशा में उड़ाओगे तो बहुत दूर तक जाएगी नहीं तो
पतंग को हवा की दिशा में उड़ाओगे तो बहुत दूर तक जाएगी नहीं तो
Rj Anand Prajapati
■ एक_और_बरसी...
■ एक_और_बरसी...
*Author प्रणय प्रभात*
ठहर गया
ठहर गया
sushil sarna
अवध से राम जाते हैं,
अवध से राम जाते हैं,
अनूप अम्बर
जीवन में भी
जीवन में भी
Dr fauzia Naseem shad
" बच्चा दिल का सच्चा"
Dr Meenu Poonia
शे’र/ MUSAFIR BAITHA
शे’र/ MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
मुझे याद आता है मेरा गांव
मुझे याद आता है मेरा गांव
Adarsh Awasthi
2270.
2270.
Dr.Khedu Bharti
हम उनसे नहीं है भिन्न
हम उनसे नहीं है भिन्न
जगदीश लववंशी
आज के युग में नारीवाद
आज के युग में नारीवाद
Surinder blackpen
चिढ़ है उन्हें
चिढ़ है उन्हें
Shekhar Chandra Mitra
बीमार घर/ (नवगीत)
बीमार घर/ (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कलम की वेदना (गीत)
कलम की वेदना (गीत)
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
सादगी
सादगी
राजेंद्र तिवारी
तुम्हे तो अभी घर का रिवाज भी तो निभाना है
तुम्हे तो अभी घर का रिवाज भी तो निभाना है
शेखर सिंह
मुक्तक...छंद-रूपमाला/मदन
मुक्तक...छंद-रूपमाला/मदन
डॉ.सीमा अग्रवाल
जिंदगी में.....
जिंदगी में.....
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
*पशु- पक्षियों की आवाजें*
*पशु- पक्षियों की आवाजें*
Dushyant Kumar
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
*भंडारे की पूड़ियॉं, हलवे का मधु स्वाद (कुंडलिया)*
*भंडारे की पूड़ियॉं, हलवे का मधु स्वाद (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ना कोई संत, न भक्त, ना कोई ज्ञानी हूँ,
ना कोई संत, न भक्त, ना कोई ज्ञानी हूँ,
डी. के. निवातिया
निराशा एक आशा
निराशा एक आशा
डॉ. शिव लहरी
संविधान से, ये देश चलता,
संविधान से, ये देश चलता,
SPK Sachin Lodhi
रिश्ते
रिश्ते
Ram Krishan Rastogi
चन्द फ़ितरती दोहे
चन्द फ़ितरती दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
दिल में कुण्ठित होती नारी
दिल में कुण्ठित होती नारी
Pratibha Pandey
पत्थर की अभिलाषा
पत्थर की अभिलाषा
Shyam Sundar Subramanian
गुरुर ज्यादा करोगे
गुरुर ज्यादा करोगे
Harminder Kaur
Loading...