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31 Dec 2022 · 2 min read

नव बर्ष 2023 काआगाज

फतवा
– उसके नाम –

मानव हो अनमोल रहा मेरे प्रभु तेरी जगती में |
है एक हेतु हों नाम अलग खोया क्यों दल – दल भक्ति में ||

वो अल्ला में ही दम भरतानाम उसी का हम – दम बनता |
नानक गुरु के सिजदे करता पांच तंत्र को धारण करता ||
चढ़ सलीम जीसस बलदानी भौतिकता का सिजदा करता |
प्रोटेस्टैंट बने कैथोलिक मतभेद स्वयं न खुद हरता ||

आंधी है अत्याचारों की झूंझ रहे सब निज हस्ती में |
है एक हेतु हों नाम अलग खोया क्यों दल – दल भक्ति में ||

उनका जमीर भी बटा हुआ कुछ आर्य तथा कुछ अनार्य बने |
बुत को कुछ नें पूजा माना कुछ ऋषि महिमा में आस जने ||
छुआ छूट की हामी भरते अपना पन अब नहीं जाना |
लाग डाट धर्मो का मानक मानव तो बस दास बना ||

सदियां बीत गयी पीड़ित संतति भी सिसकी हस्ती में |
है एक हेतु हों नाम अलग खोया क्यों दल – दल भक्ति में ||

निर्णायक ये पल आया है वर्ष नहीं अब ऎसा होगा |
प्रेम नहीं बस फतवा होगा रिश्ता सबका वैसा होगा ||
दुःख सबका भी अपना होगा नहीं कोई निज दुःख में डूबा |
झंडा ब्रह्माण्ड फहरता होगा सबका होगा न बस सूबा ||

यह विनय नहीं व्रत ही मानें हो न उल्लंघन हस्ती में |
है एक हेतु हों नाम अलग खोया क्यों दल – दल भक्ति में ||

है इंतजार घड़ी अब ख़तम हुई घंटा बोलै 23 आया है |
अज्ञान तिमिर सब मिट जाएं अब प्रेम भाव ही पाया है ||
परम विनय ले शपथ हृदय में मार्ग बदल सज्जन बन जाए |
कोई हो बाधा न उलझन हमलावर दुर्जन हट जाये ||

अभिलाषा में मांगता भीख सहज अर्पित मस्ती में |
है एक हेतु हों नाम अलग खोया क्यों दल – दल भक्ति में ||

डॉ. गिरीश चंद्र अग्रवाल
दयाल बाग , आगरा , उत्तर प्रदेश , भारत
फ़ोन – 7668151252

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