Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Jan 2024 · 1 min read

नया साल नई उमंग

नया साल नई उमंग
बस जैसे हो निकल जाए नई तरंग

1 Like · 90 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
गांव के छोरे
गांव के छोरे
जय लगन कुमार हैप्पी
मैं भी चुनाव लड़ूँगा (हास्य कविता)
मैं भी चुनाव लड़ूँगा (हास्य कविता)
Dr. Kishan Karigar
बाबुल का घर तू छोड़ चली
बाबुल का घर तू छोड़ चली
gurudeenverma198
हमें कोयले संग हीरे मिले हैं।
हमें कोयले संग हीरे मिले हैं।
surenderpal vaidya
देश काल और परिस्थितियों के अनुसार पाखंडियों ने अनेक रूप धारण
देश काल और परिस्थितियों के अनुसार पाखंडियों ने अनेक रूप धारण
विमला महरिया मौज
तुझे ढूंढने निकली तो, खाली हाथ लौटी मैं।
तुझे ढूंढने निकली तो, खाली हाथ लौटी मैं।
Manisha Manjari
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
Mahender Singh
3453🌷 *पूर्णिका* 🌷
3453🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
आए हैं रामजी
आए हैं रामजी
SURYA PRAKASH SHARMA
सावन भादों
सावन भादों
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बुंदेली दोहा -खिलकट (आधे पागल)
बुंदेली दोहा -खिलकट (आधे पागल)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
गुरू द्वारा प्राप्त ज्ञान के अनुसार जीना ही वास्तविक गुरू दक
गुरू द्वारा प्राप्त ज्ञान के अनुसार जीना ही वास्तविक गुरू दक
SHASHANK TRIVEDI
भूल जाऊं तुझे भूल पता नहीं
भूल जाऊं तुझे भूल पता नहीं
VINOD CHAUHAN
जरूरी तो नहीं - हरवंश हृदय
जरूरी तो नहीं - हरवंश हृदय
हरवंश हृदय
आज जब वाद सब सुलझने लगे...
आज जब वाद सब सुलझने लगे...
डॉ.सीमा अग्रवाल
झूठी शान
झूठी शान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
#लघु_व्यंग्य
#लघु_व्यंग्य
*प्रणय प्रभात*
साहिल समंदर के तट पर खड़ी हूँ,
साहिल समंदर के तट पर खड़ी हूँ,
Sahil Ahmad
काशी
काशी
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
जीवन दर्शन मेरी नज़र से. .
जीवन दर्शन मेरी नज़र से. .
Satya Prakash Sharma
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
Kanchan Khanna
मेरे लिखने से भला क्या होगा कोई पढ़ने वाला तो चाहिए
मेरे लिखने से भला क्या होगा कोई पढ़ने वाला तो चाहिए
DrLakshman Jha Parimal
मौसम  सुंदर   पावन  है, इस सावन का अब क्या कहना।
मौसम सुंदर पावन है, इस सावन का अब क्या कहना।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
****रघुवीर आयेंगे****
****रघुवीर आयेंगे****
Kavita Chouhan
सत्य कहाँ ?
सत्य कहाँ ?
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
"बिल्ली कहती म्याऊँ"
Dr. Kishan tandon kranti
धनतेरस जुआ कदापि न खेलें
धनतेरस जुआ कदापि न खेलें
कवि रमेशराज
शीर्षक - स्वप्न
शीर्षक - स्वप्न
Neeraj Agarwal
जिंदगी बोझ लगेगी फिर भी उठाएंगे
जिंदगी बोझ लगेगी फिर भी उठाएंगे
पूर्वार्थ
प्रकाश एवं तिमिर
प्रकाश एवं तिमिर
Pt. Brajesh Kumar Nayak
Loading...