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25 Jun 2023 · 1 min read

नज़राना

ग़ज़ल

नज़राना

दिल का नज़राना तेरे लिये है ।
प्यार का अफ़साना तेरे लिये है ।।

तू है शम्मा मुक़द्दर की मेरे ।
ये रोशन परवाना तेरे लिये है ।।

तेरी उल्फ़त मेरी ज़िंदगानी है ।
ये आशिक़ दीवाना तेरे लिये है ।।

मदहोश हुए तेरी अदाओं से हम ।
ये जाम ये पैमाना तेरे लिये है ।।

संभाल रक्खे हैं वो नायाब मोती ।
अश्कों का ये ख़ज़ाना तेरे लिये है ।।

यूं तो ग़ुमसुम रहते हैं “काज़ी ” ।
ये दिखावटी हंसना हंसाना तेरे लिये है ।।

© डॉक्टर वासिफ़ काज़ी,इंदौर
© काज़ीकीक़लम

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