Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 May 2024 · 1 min read

धूल

धूल उडी उड़ बैठ गयी,
कँहा बैठ गयी कुछ पता नही।
जब उड़ती थी तब द्र्ष्य हुयी,
जब बैठ गयी तब दिखी नहीं।
कोई तेज हवा का झोंका था,
जिसने ही उसे उड़ाया था।
उसका भी कोई अस्तित्व है,
इस जग को फिर दिखलाया था।
जब हवा रुकी तब धूल रुकी,
जिस मिट्टी से वो निकली थी,
उस मिट्टी में वो बैठ गयी।
कँहा बैठ गयी कुछ पता नही।

Language: Hindi
1 Like · 28 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from प्रदीप कुमार गुप्ता
View all
You may also like:
रूठकर के खुदसे
रूठकर के खुदसे
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
रोगों से है यदि  मानव तुमको बचना।
रोगों से है यदि मानव तुमको बचना।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
“Do not be afraid of your difficulties. Do not wish you coul
“Do not be afraid of your difficulties. Do not wish you coul
पूर्वार्थ
चौथापन
चौथापन
Sanjay ' शून्य'
मौन संवाद
मौन संवाद
Ramswaroop Dinkar
विरह गीत
विरह गीत
नाथ सोनांचली
*बादलों से घिरा, दिन है ज्यों रात है (मुक्तक)*
*बादलों से घिरा, दिन है ज्यों रात है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
समय
समय
Neeraj Agarwal
16)”अनेक रूप माँ स्वरूप”
16)”अनेक रूप माँ स्वरूप”
Sapna Arora
"व्यक्ति जब अपने अंदर छिपी हुई शक्तियों के स्रोत को जान लेता
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
हृदय के राम
हृदय के राम
इंजी. संजय श्रीवास्तव
हम दुसरों की चोरी नहीं करते,
हम दुसरों की चोरी नहीं करते,
Dr. Man Mohan Krishna
आखिर कब तक इग्नोर करोगे हमको,
आखिर कब तक इग्नोर करोगे हमको,
शेखर सिंह
बात मेरे मन की
बात मेरे मन की
Sûrëkhâ
खुद पर यकीन,
खुद पर यकीन,
manjula chauhan
तुम्हें पाने के लिए
तुम्हें पाने के लिए
Surinder blackpen
मोल
मोल
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
बहुत से लोग आएंगे तेरी महफ़िल में पर
बहुत से लोग आएंगे तेरी महफ़िल में पर "कश्यप"।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
चाय की दुकान पर
चाय की दुकान पर
gurudeenverma198
दुख तब नहीं लगता
दुख तब नहीं लगता
Harminder Kaur
"पहचान"
Dr. Kishan tandon kranti
मनभावन
मनभावन
SHAMA PARVEEN
शहीद रामफल मंडल गाथा।
शहीद रामफल मंडल गाथा।
Acharya Rama Nand Mandal
शिक्षक दिवस पर गुरुवृंद जनों को समर्पित
शिक्षक दिवस पर गुरुवृंद जनों को समर्पित
Lokesh Sharma
छन-छन के आ रही है जो बर्गे-शजर से धूप
छन-छन के आ रही है जो बर्गे-शजर से धूप
Sarfaraz Ahmed Aasee
23/50.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/50.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
महफिल में तनहा जले,
महफिल में तनहा जले,
sushil sarna
चम-चम चमके चाँदनी
चम-चम चमके चाँदनी
Vedha Singh
नमस्ते! रीति भारत की,
नमस्ते! रीति भारत की,
Neelam Sharma
बताओगे कैसे, जताओगे कैसे
बताओगे कैसे, जताओगे कैसे
Shweta Soni
Loading...