Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 May 2023 · 1 min read

द्वंद अनेकों पलते देखे (नवगीत)

नवगीत_22

———

एक अँधेरा
सा छा जाता है
परिवर्तित व्यवहारों में ।
द्वंद्व अनेकों
पलते देखे,
संवेदनहीन विचारों में ।

स्वार्थ लिए
निजता बढ़ती है
लघुता विस्तृत हो जाती
सम्बन्धों की
डोर सुकोमल
टूट कहीं पर मुरझाती
अनबन चुप्पी
साधे बैठी
नित खुश रहते परिवारों में ।

आच्छादित
सच्चाई की
अनुभूति नही कर पाता है
अहसास प्रकृति के
मिट जाते
उर पत्थर बन जाता है
लोलुपता घुल
जाती है हठकर
मानव के संस्कारों में ।

मन के चौखट
पर विस्तारित
दुर्गुण पहरा देता है
निर्णय की
सामर्थ्य तिरोहित
कर दुख गहरा देता है
मनुज सदा
उलझा रहता है
निजहित के ही त्योहारों में ।

पशु से भी बदतर
वह मानव
जड़ चेतन का भान नही
भाव-विहीन
समाज-विनाशक
है जिसको अनुमान नही
क्या अच्छा है
और बुरा क्या ?
फ़र्क नही कुछ अधिकारों में ।

–रकमिश सुल्तानपुरी

241 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जो भूल गये हैं
जो भूल गये हैं
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
12) “पृथ्वी का सम्मान”
12) “पृथ्वी का सम्मान”
Sapna Arora
जुगनू
जुगनू
Dr. Pradeep Kumar Sharma
शुभ दिन सब मंगल रहे प्रभु का हो वरदान।
शुभ दिन सब मंगल रहे प्रभु का हो वरदान।
सत्य कुमार प्रेमी
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
PK Pappu Patel
"ज़िंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या खाक़ जीया करते है
Mukul Koushik
डुगडुगी बजती रही ....
डुगडुगी बजती रही ....
sushil sarna
उसकी बाहो में ये हसीन रात आखिरी होगी
उसकी बाहो में ये हसीन रात आखिरी होगी
Ravi singh bharati
"आँगन की तुलसी"
Ekta chitrangini
जनता के आवाज
जनता के आवाज
Shekhar Chandra Mitra
आजा रे अपने देश को
आजा रे अपने देश को
gurudeenverma198
हम तुम्हें लिखना
हम तुम्हें लिखना
Dr fauzia Naseem shad
शब्द लौटकर आते हैं,,,,
शब्द लौटकर आते हैं,,,,
Shweta Soni
डा. तेज सिंह : हिंदी दलित साहित्यालोचना के एक प्रमुख स्तंभ का स्मरण / MUSAFIR BAITHA
डा. तेज सिंह : हिंदी दलित साहित्यालोचना के एक प्रमुख स्तंभ का स्मरण / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
मुट्ठी भर आस
मुट्ठी भर आस
Kavita Chouhan
■ ग़ज़ल (वीक एंड स्पेशल) -
■ ग़ज़ल (वीक एंड स्पेशल) -
*Author प्रणय प्रभात*
पिया-मिलन
पिया-मिलन
Kanchan Khanna
Whenever My Heart finds Solitude
Whenever My Heart finds Solitude
कुमार
धर्म बनाम धर्मान्ध
धर्म बनाम धर्मान्ध
Ramswaroop Dinkar
"नहीं देखने हैं"
Dr. Kishan tandon kranti
" रहना तुम्हारे सँग "
DrLakshman Jha Parimal
सधे कदम
सधे कदम
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
Expectation is the
Expectation is the
Shyam Sundar Subramanian
मेरी आँखों में देखो
मेरी आँखों में देखो
हिमांशु Kulshrestha
नहीं विश्वास करते लोग सच्चाई भुलाते हैं
नहीं विश्वास करते लोग सच्चाई भुलाते हैं
आर.एस. 'प्रीतम'
काजल
काजल
SHAMA PARVEEN
2983.*पूर्णिका*
2983.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
"परिपक्वता"
Dr Meenu Poonia
सच हकीकत और हम बस शब्दों के साथ हैं
सच हकीकत और हम बस शब्दों के साथ हैं
Neeraj Agarwal
इश्क खुदा का घर
इश्क खुदा का घर
Surinder blackpen
Loading...