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16 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-145💐

तुम्हारे अन्दर ज़िद है वह मूर्खता लिए हुए है।दूरदर्शिता सहित ज़िद उन्नति की प्रेरक है।तुम मूर्ख हो।तुम्हें एहसास भी हो रहा है।
©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
53 Views
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