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30 Aug 2021 · 1 min read

तमन्नाएँ

शोले भड़कते अन्तस में
लगता है जैसे
चिंगारी देने को कोई
तूफाँ आया है
मन की भित्तियों से एक
आवाज आती
शायद दिल दर्पण टूट के
चूर हुआ है

गुलदस्ता तमन्नाओं का
सजाया हसीँ
उगे फूल कामेच्छाओं
के रंगीन
सींचना चाह उन्हें मैनें
प्रेमावेग से
आ गई सुनामी लहरें
तोड़ गई वो तट मेरे
हृदय तल के

प्यार नाम है पाने का
मन प्रसून
मेरा विकल कुम्हलाया
है क्यों
लगता है गुलिस्तां मैने
सजाया
तमन्नाओ का सँजो कर
चूर हो गया

Language: Hindi
79 Likes · 1 Comment · 376 Views
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