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10 Apr 2024 · 1 min read

डॉ अरूण कुमार शास्त्री

डॉ अरूण कुमार शास्त्री
मृत्युलोक अर्थात धरती पर जब इन्सान को भेजा जाता है तो ईश्वर की इच्छा होती है कि इंसान अधिक से अधिक इंसानों के संपर्क में आए और उनसे प्रेम प्यार बढ़ाए।
इसका सीधा सा अर्थ यही है कि ईश्वर लोक में जब हम आत्म स्वरूप होते हैं तो अशरीरी होने से हम एक दूसरे को पहचान नहीं पाते।
लेकिन पृथ्वी लोक पर आते ही अहंकार भी जनित होता है और हम किसी एक दो में ही ऊलझ के रह जाते हैं।

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