Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Nov 10, 2016 · 1 min read

जीवन का एक दुर्लभ भाग बचपन

पानी में कागज की वो नाव चलाना
खेल खेलना और खिलाना
मजे करते थे हम भरपूर
छल कपट से थे हम दूर
खेल खिलौने हमारी मिट्टी
नाटक में चंदा मामा को लिखते थे चिठ्ठी
चोर सिपाही , गिल्ली डंडा , चंगा अठ्ठा
मास्साब हमसे कहते थे , और पठ्ठा
बरसात में वो भींगना , धूप में वो खेलना
सर्दियों में अलाव तापना उस पल का कोई मेल ना
सुनना वो कहानियों को और तानों को भी
क्या रोकता सकता था कोई हम जैसे मस्तानों को भी
बस वो तो समय है गुजर जाता है
बीत गया बचपन अब ना वापिस आता है
– नवीन कुमार जैन

169 Views
You may also like:
झूला सजा दो
Buddha Prakash
क्या सोचता हूँ मैं भी
gurudeenverma198
यह दुनिया है कैसी
gurudeenverma198
स्वयं में एक संस्था थे श्री ओमकार शरण ओम
Ravi Prakash
भगवान की तलाश में इंसान
Ram Krishan Rastogi
तुम ख़्वाबों की बात करते हो।
Taj Mohammad
"ज़िंदगी अगर किताब होती"
पंकज कुमार "कर्ण"
बॉर्डर पर किसान
Shriyansh Gupta
मैं वफ़ा हूँ अपने वादे पर
gurudeenverma198
मकड़ी है कमाल
Buddha Prakash
नियत मे पर्दा
Vikas Sharma'Shivaaya'
यह जिन्दगी है।
Taj Mohammad
हसद
Alok Saxena
महिला काव्य
AMRESH KUMAR VERMA
पैसों का खेल
AMRESH KUMAR VERMA
पिता के जैसा......नहीं देखा मैंने दुजा
Dr. Alpa H. Amin
तुम मेरे वो तुम हो...
Sapna K S
बेरूखी
Anamika Singh
हौसला
Mahendra Rai
रामपुर का इतिहास (पुस्तक समीक्षा)
Ravi Prakash
औरतें
Kanchan Khanna
दुनिया की रीति
AMRESH KUMAR VERMA
ये चिड़िया
Anamika Singh
Human Brain
Buddha Prakash
"अंतिम-सत्य..!"
Prabhudayal Raniwal
दिल तड़फ रहा हैं तुमसे बात करने को
Krishan Singh
साहब का कुत्ता (हास्य व्यंग्य कहानी)
दुष्यन्त 'बाबा'
धार्मिक उन्माद
Rakesh Pathak Kathara
खमोशी है जिसका गहना
शेख़ जाफ़र खान
जिन्दगी है हमसे रूठी।
Taj Mohammad
Loading...