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17 Feb 2017 · 1 min read

जीवनी स्थूल है/सूखा फूल है

जीवनी स्थूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
ईश्वर पत्थर में पर पाते सदा वह फूल है।
आचरण का बल तथा जित ज्ञान-प्रेमी तूल है।
उसी दर पर लोग आएंगे सदा सद्बोधहित।
चले जो विपरीत उसकी जीवनी स्थूल है।

सूखा फूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
प्यार बिन सारा जगत स्थूल है।
प्रीति,पोषक जल भरी शुभ गूल है।
लहलहाओगे न तुम, सद्हर्ष बिन।
प्रेम बिन उर-फसल सूखा फूल है।

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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