Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Jan 2024 · 1 min read

*जाड़े की भोर*

आ गया मौसम शरद ऋतु का अब
सब ने ओढ़ लिए है अपने अपने लिबास
सूरज ने भी पहन लिया है बादलों के ऊपर
फिर वही कोहरे का मोटा कोट

बचने की कोशिश कर रहे सब जाड़े से
मेमने भी निकलने को राज़ी नहीं बाड़े से
झूल रही जमे पानी की सिल्लियां छतों से
सबकी बढ़ रही मुश्किलें इस जाड़े से

बूढ़ी दादी ने संभाल लिया रसोई का किनारा
उसे जलते हुए चुल्हे का है अब सहारा
ये कमबख्त बिजली भी न चली जाए अब
मुश्किलों में न हो जाए इज़ाफा हमारा

बेचारे पशुओं का तो सर्दी से
और भी बुरा हाल हो रहा है
घूम रहे असहाय सड़कों पर
ठंड में जीना मुहाल हो रहा है

ढक दिया पहाड़ों ने खुद को
फिर बर्फ की मोटी चादर से
बुला रहे प्रकृति प्रेमियों को
आज अपने पास बड़े आदर से

जम गए है नदी नाले सारे
थम गई है जीवन की डोर
कोई दिख नहीं रहा बाहर
देखो न हो गई है भोर।

4 Likes · 1 Comment · 1610 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
चंद एहसासात
चंद एहसासात
Shyam Sundar Subramanian
Kitna hasin ittefak tha ,
Kitna hasin ittefak tha ,
Sakshi Tripathi
#लघुकथा
#लघुकथा
*Author प्रणय प्रभात*
कम्प्यूटर ज्ञान :- नयी तकनीक- पावर बी आई
कम्प्यूटर ज्ञान :- नयी तकनीक- पावर बी आई
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
* तपन *
* तपन *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
देर हो जाती है अकसर
देर हो जाती है अकसर
Surinder blackpen
मैं समुद्र की गहराई में डूब गया ,
मैं समुद्र की गहराई में डूब गया ,
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
"चाह"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
दीनानाथ दिनेश जी से संपर्क
दीनानाथ दिनेश जी से संपर्क
Ravi Prakash
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
The_dk_poetry
"फर्क"-दोनों में है जीवन
Dr. Kishan tandon kranti
हटा 370 धारा
हटा 370 धारा
लक्ष्मी सिंह
लौटना पड़ा वहाँ से वापस
लौटना पड़ा वहाँ से वापस
gurudeenverma198
ईमान
ईमान
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
कैसे वोट बैंक बढ़ाऊँ? (हास्य कविता)
कैसे वोट बैंक बढ़ाऊँ? (हास्य कविता)
Dr. Kishan Karigar
ख़ुदा ने बख़्शी हैं वो ख़ूबियाँ के
ख़ुदा ने बख़्शी हैं वो ख़ूबियाँ के
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
3201.*पूर्णिका*
3201.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
शाश्वत, सत्य, सनातन राम
शाश्वत, सत्य, सनातन राम
श्रीकृष्ण शुक्ल
“Your work is going to fill a large part of your life, and t
“Your work is going to fill a large part of your life, and t
पूर्वार्थ
बहुत हुआ
बहुत हुआ
Mahender Singh
राष्ट्र भाषा राज भाषा
राष्ट्र भाषा राज भाषा
Dinesh Gupta
मेला एक आस दिलों🫀का🏇👭
मेला एक आस दिलों🫀का🏇👭
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
सच तो फूल होते हैं।
सच तो फूल होते हैं।
Neeraj Agarwal
अरुणोदय
अरुणोदय
Manju Singh
कोई साया
कोई साया
Dr fauzia Naseem shad
दुनिया दिखावे पर मरती है , हम सादगी पर मरते हैं
दुनिया दिखावे पर मरती है , हम सादगी पर मरते हैं
कवि दीपक बवेजा
मौहब्बत को ख़ाक समझकर ओढ़ने आयी है ।
मौहब्बत को ख़ाक समझकर ओढ़ने आयी है ।
Phool gufran
गले से लगा ले मुझे प्यार से
गले से लगा ले मुझे प्यार से
Basant Bhagawan Roy
शब्द गले में रहे अटकते, लब हिलते रहे।
शब्द गले में रहे अटकते, लब हिलते रहे।
विमला महरिया मौज
बगुलों को भी मिल रहा,
बगुलों को भी मिल रहा,
sushil sarna
Loading...