Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 May 2024 · 1 min read

ज़माने की नजर में बहुत

ज़माने की नजर में बहुत
बुरा इंसान बनता जा रहा हूं मैं
दरअसल खुद के लिए बहुत
अच्छा बनता जा रहा हूं मैं
शिव प्रताप लोधी

34 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from शिव प्रताप लोधी
View all
You may also like:
"देखो"
Dr. Kishan tandon kranti
रात के अंँधेरे का सौंदर्य वही बता सकता है जिसमें बहुत सी रात
रात के अंँधेरे का सौंदर्य वही बता सकता है जिसमें बहुत सी रात
Neerja Sharma
जिंदगी मुस्कुराती थी कभी, दरख़्तों की निगेहबानी में, और थाम लेता था वो हाथ मेरा, हर एक परेशानी में।
जिंदगी मुस्कुराती थी कभी, दरख़्तों की निगेहबानी में, और थाम लेता था वो हाथ मेरा, हर एक परेशानी में।
Manisha Manjari
*झूला सावन मस्तियॉं, काले मेघ फुहार (कुंडलिया)*
*झूला सावन मस्तियॉं, काले मेघ फुहार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
# विचार
# विचार
DrLakshman Jha Parimal
शेर अर्ज किया है
शेर अर्ज किया है
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
मुराद
मुराद
Mamta Singh Devaa
मां
मां
Dr. Pradeep Kumar Sharma
खुद पर भी यकीं,हम पर थोड़ा एतबार रख।
खुद पर भी यकीं,हम पर थोड़ा एतबार रख।
पूर्वार्थ
इज़्ज़त
इज़्ज़त
Jogendar singh
आशा की किरण
आशा की किरण
Neeraj Agarwal
जीनते भी होती है
जीनते भी होती है
SHAMA PARVEEN
महान जन नायक, क्रांति सूर्य,
महान जन नायक, क्रांति सूर्य, "शहीद बिरसा मुंडा" जी को उनकी श
नेताम आर सी
जब आपके आस पास सच बोलने वाले न बचे हों, तो समझिए आस पास जो भ
जब आपके आस पास सच बोलने वाले न बचे हों, तो समझिए आस पास जो भ
Sanjay ' शून्य'
सृजन पथ पर
सृजन पथ पर
Dr. Meenakshi Sharma
मन नहीं होता
मन नहीं होता
Surinder blackpen
dr arun kumar shastri
dr arun kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पैसा बोलता है
पैसा बोलता है
Mukesh Kumar Sonkar
सोशलमीडिया की दोस्ती
सोशलमीडिया की दोस्ती
लक्ष्मी सिंह
बिहार, दलित साहित्य और साहित्य के कुछ खट्टे-मीठे प्रसंग / MUSAFIR BAITHA
बिहार, दलित साहित्य और साहित्य के कुछ खट्टे-मीठे प्रसंग / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
मैं तो महज पहचान हूँ
मैं तो महज पहचान हूँ
VINOD CHAUHAN
महिला दिवस विशेष दोहे
महिला दिवस विशेष दोहे
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
🙅Dont Worry🙅
🙅Dont Worry🙅
*प्रणय प्रभात*
बहुत ही हसीन तू है खूबसूरत
बहुत ही हसीन तू है खूबसूरत
gurudeenverma198
कान्हा को समर्पित गीतिका
कान्हा को समर्पित गीतिका "मोर पखा सर पर सजे"
अटल मुरादाबादी, ओज व व्यंग कवि
जिंदगी के रंगों को छू लेने की,
जिंदगी के रंगों को छू लेने की,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
(12) भूख
(12) भूख
Kishore Nigam
ज़िंदगी नाम बस
ज़िंदगी नाम बस
Dr fauzia Naseem shad
नौ वर्ष(नव वर्ष)
नौ वर्ष(नव वर्ष)
Satish Srijan
Loading...