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Oct 31, 2016 · 1 min read

जब से उसकी नज़रों का मैं निशाना बना

जब से उसकी नज़रों का मैं निशाना बना,
तबसे उसकी गली में मेरा आना जाना बना।

खुदा की रौशनी ज़मीं पे कोई नूर है वो,
है जन्नतों से उतर आई कोई हूर है वो,
ये शहर सारा उसके हुस्न का दीवाना बना,
तबसे उसकी गली में मेरा आना जाना बना।

ये चाँद बन के दीवाना गली में घूम रहा था,
तेरे पैरो के निशां भी लबो से चूम रहा था,
बड़ा मशहुर इसके इस्क का फ़साना बना,
तबसे उसकी गली में मेरा आना जाना बना।

कितनी रुशवाईयों को दिल में ले के बैठा था,
बूझे चिराग सा ये दिल मैं ले के बैठा था,
तुझे देखा तो जल उठा दिल ये परवाना बना,
तबसे उसकी गली में मेरा आना जाना बना।

जब से उसकी नज़रों का मैं निशाना बना,
तबसे उसकी गली में मेरा आना जाना बना।

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