Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Feb 2024 · 2 min read

“शहीद साथी”

जब सारा देश जीती हुई जंग की ख़ुशी मना रहा था,
तब एक फौजी अपने साथी की जान बचाने की जंग लड़ रहा था,
अपनी गोद में बैठा कर उसको लंबी ज़िन्दगी के झूठे वादे दे रहा था,
वो जान रहा था साँसे मेरे साथी की महज़ चंन्द घड़ियों की मेहमान थी,
फ़िर भी उसको कंधे में बैठा कर वो कैंप की और दौड़ रहा था,

ना जज़्बात उसके काबू में थे और ना था वक़्त,
कैसे एक दूसरे के साथ कंधे से कन्धा मिलाए अपने देश के लिए लड़ रहे थे जंग याद आ रहे थे उसको ये सब पल,
टूटी साँसे निकला उस फौजी के साथी का दाम था,
मौत की गोद में जाते हुए उसने अपने साथी को जो दिया वो ज़िंमेदारी से भरा एक खत था,

खत में थे उसके शब्द उसकी याद और ज़िंदा उसके जज़्बात,
डर बस उसको इतना था कैसे देखेगा उस माँ की आँखों में जिसने खोया है बेटा अपना, दिल में है हजारों सवाल पर मौन होगा चेहरा उसका,

कैसे देखेगा उन आँखों को जिसने खोया है पति अपना, पूछेंगी वो बेवा की निगाहें क्यों लौट ना सके वो जो हर वादा निभाते थे,
पूछेंगी वो नन्ही सी आँखे सवाल कई, क्या लौटेंगे हमारे पिता कभी?

यही सब सोच कर उस फ़ौजी का दिल घबरा रहा था, जंग में लड़ना आसान है या एक चिट्ठी के साथ उन सब आँखों को देखना वो जंग है, ये सवाल भी उस वक़्त सवाल ही रह गया,
जब सारा देश जीती हुई जंग की ख़ुशी मन रहा था,
तब एक फौजी अपने साथी की जान बचाने की जंग लड़ रहा था।
“लोहित टम्टा”

88 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"प्रेम और क्रोध"
Dr. Kishan tandon kranti
**कब से बंद पड़ी है गली दुकान की**
**कब से बंद पड़ी है गली दुकान की**
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
माँ कहती है खुश रहे तू हर पल
माँ कहती है खुश रहे तू हर पल
Harminder Kaur
दीप्ति
दीप्ति
Kavita Chouhan
पता नहीं था शायद
पता नहीं था शायद
Pratibha Pandey
माँ भारती के वरदपुत्र: नरेन्द्र मोदी
माँ भारती के वरदपुत्र: नरेन्द्र मोदी
Dr. Upasana Pandey
2443.पूर्णिका
2443.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
खामोश अवशेष ....
खामोश अवशेष ....
sushil sarna
दिल का कोई
दिल का कोई
Dr fauzia Naseem shad
अंबर तारों से भरा, फिर भी काली रात।
अंबर तारों से भरा, फिर भी काली रात।
लक्ष्मी सिंह
💐प्रेम कौतुक-561💐
💐प्रेम कौतुक-561💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
अच्छे   बल्लेबाज  हैं,  गेंदबाज   दमदार।
अच्छे बल्लेबाज हैं, गेंदबाज दमदार।
गुमनाम 'बाबा'
मैं एक महल हूं।
मैं एक महल हूं।
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
आभा पंखी से बढ़ी ,
आभा पंखी से बढ़ी ,
Rashmi Sanjay
मर्यादा और राम
मर्यादा और राम
Dr Parveen Thakur
यूँ  भी  हल्के  हों  मियाँ बोझ हमारे  दिल के
यूँ भी हल्के हों मियाँ बोझ हमारे दिल के
Sarfaraz Ahmed Aasee
हमारी सोच
हमारी सोच
Neeraj Agarwal
चाय की चुस्की संग
चाय की चुस्की संग
Surinder blackpen
शादी अगर जो इतनी बुरी चीज़ होती तो,
शादी अगर जो इतनी बुरी चीज़ होती तो,
पूर्वार्थ
अंकुर
अंकुर
manisha
तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूं ग़ज़ल की ये क़िताब,
तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूं ग़ज़ल की ये क़िताब,
Sahil Ahmad
रहे_ ना _रहे _हम सलामत रहे वो,
रहे_ ना _रहे _हम सलामत रहे वो,
कृष्णकांत गुर्जर
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप
Ravi Yadav
मेरे मरने के बाद
मेरे मरने के बाद
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
जिंदगी से कुछ यू निराश हो जाते हैं
जिंदगी से कुछ यू निराश हो जाते हैं
Ranjeet kumar patre
शायरी
शायरी
डॉ मनीष सिंह राजवंशी
एक बेहतर जिंदगी का ख्वाब लिए जी रहे हैं सब
एक बेहतर जिंदगी का ख्वाब लिए जी रहे हैं सब
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
थूंक पॉलिस
थूंक पॉलिस
Dr. Pradeep Kumar Sharma
दीप शिखा सी जले जिंदगी
दीप शिखा सी जले जिंदगी
Suryakant Dwivedi
तूफान सी लहरें मेरे अंदर है बहुत
तूफान सी लहरें मेरे अंदर है बहुत
कवि दीपक बवेजा
Loading...