Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jan 2024 · 1 min read

चुप

जब बोलना था तब जनाब चुप रह गये
कुछ न बोले सारे ख्वाब चुप रह गये

डर था झिझक थी या मसला कोई और
सोचे अब कौन बेहिसाब चुप रह गये

यूँ तो बेझिझक बोल देते थे सब कुछ
जाने फिर क्या हुआ खराब चुप रह गये

मैंने तो पूछा था मुख़्तसर सा सवाल
दिया नहीं कोई भी जवाब चुप रह गये

अजय मिश्र

Language: Hindi
75 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एहसास
एहसास
भरत कुमार सोलंकी
डिप्रेशन कोई मज़ाक नहीं है मेरे दोस्तों,
डिप्रेशन कोई मज़ाक नहीं है मेरे दोस्तों,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
— कैसा बुजुर्ग —
— कैसा बुजुर्ग —
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
शीर्षक -  आप और हम जीवन के सच
शीर्षक - आप और हम जीवन के सच
Neeraj Agarwal
आजादी की कहानी
आजादी की कहानी
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
" मेरे प्यारे बच्चे "
Dr Meenu Poonia
इंद्रधनुषी प्रेम
इंद्रधनुषी प्रेम
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
नव वर्ष गीत
नव वर्ष गीत
Dr. Rajeev Jain
दिन सुहाने थे बचपन के पीछे छोड़ आए
दिन सुहाने थे बचपन के पीछे छोड़ आए
इंजी. संजय श्रीवास्तव
एक कहानी है, जो अधूरी है
एक कहानी है, जो अधूरी है
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
खूब उड़ रही तितलियां
खूब उड़ रही तितलियां
surenderpal vaidya
तन मन में प्रभु करें उजाला दीप जले खुशहाली हो।
तन मन में प्रभु करें उजाला दीप जले खुशहाली हो।
सत्य कुमार प्रेमी
संवाद होना चाहिए
संवाद होना चाहिए
संजय कुमार संजू
वरदान
वरदान
पंकज कुमार कर्ण
याद आते हैं
याद आते हैं
Chunnu Lal Gupta
विकल्प
विकल्प
Sanjay ' शून्य'
जुबान
जुबान
अखिलेश 'अखिल'
■ कारण कुछ भी हो। भूल सुधार स्वागत योग्य।।
■ कारण कुछ भी हो। भूल सुधार स्वागत योग्य।।
*Author प्रणय प्रभात*
सबको   सम्मान दो ,प्यार  का पैगाम दो ,पारदर्शिता भूलना नहीं
सबको सम्मान दो ,प्यार का पैगाम दो ,पारदर्शिता भूलना नहीं
DrLakshman Jha Parimal
इसका क्या सबूत है, तू साथ सदा मेरा देगी
इसका क्या सबूत है, तू साथ सदा मेरा देगी
gurudeenverma198
हालात ही है जो चुप करा देते हैं लोगों को
हालात ही है जो चुप करा देते हैं लोगों को
Ranjeet kumar patre
*आदत*
*आदत*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आवारा परिंदा
आवारा परिंदा
साहित्य गौरव
गलतियाँ हो गयीं होंगी
गलतियाँ हो गयीं होंगी
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
गुफ्तगू
गुफ्तगू
Naushaba Suriya
*भोग कर सब स्वर्ग-सुख, आना धरा पर फिर पड़ा (गीत)*
*भोग कर सब स्वर्ग-सुख, आना धरा पर फिर पड़ा (गीत)*
Ravi Prakash
“आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अँधा बना देगी”- गांधी जी
“आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अँधा बना देगी”- गांधी जी
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
डोमिन ।
डोमिन ।
Acharya Rama Nand Mandal
अमन तहज़ीब के परचम को हम ईमान कहते हैं।
अमन तहज़ीब के परचम को हम ईमान कहते हैं।
Phool gufran
3085.*पूर्णिका*
3085.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...