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22 Mar 2023 · 1 min read

*चाय भगोने से बाहर यदि, आ जाए तो क्या कहने 【हास्य हिंदी गजल/

चाय भगोने से बाहर यदि, आ जाए तो क्या कहने 【हास्य हिंदी गजल/ गीतिका】
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
(1)
चाय भगोने से बाहर यदि, आ जाए तो क्या कहने
मंत्री रिश्वत खाते यदि, पकड़ा जाए तो क्या कहने
(2)
रोज झिड़कियाँ मालिक की जो, चुप रह-रहकर सुनता है
वही गधा यदि मालिक पर, गुस्सा जाए तो क्या कहने
(3)
श्वेत चाँद तो सब ने देखा, नील गगन में बरसों से
कभी किसी दिन रंग बैंजनी, पा जाए तो क्या कहने
(4)
आसमान से बरसे पानी, लेकिन गाढ़ा रंग घुला
कभी किसी दिन होली ऐसी, छा जाए तो क्या कहने
(5)
युद्धक विमान बम ढोकर नभ में, उड़े और जादू हो
फूल गुलाबी-पीले वह, बरसा जाए तो क्या कहने
(6)
हाईकमान की मक्खनबाजी, करो चापलूसी कुछ
पुरस्कार या पद कोई, हथिया जाए तो क्या कहने
(7)
जिससे प्यार किया था, कॉलेज में सत्रह के जब थे
सत्तर पार कर चुकी वह, टकरा जाए तो क्या कहने
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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